ब्राह्मण समाज थांदला के वरिष्ठ एवं उपाध्याय परिवार के वटव्रक्ष स्व श्री लालशंकर जी की प्रथम पुण्यतिथि पर उपाध्याय परिवार द्वारा भव्य सुंदरकांड का पाठ*

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ब्राह्मण समाज थांदला के वरिष्ठ एवं उपाध्याय परिवार के वटव्रक्ष स्व श्री लालशंकर जी की प्रथम पुण्यतिथि पर उपाध्याय परिवार द्वारा भव्य सुंदरकांड का पाठ*

 *ब्राह्मण समाज थांदला के वरिष्ठ एवं उपाध्याय परिवार के वटव्रक्ष स्व  श्री लालशंकर जी की प्रथम पुण्यतिथि  पर उपाध्याय परिवार द्वारा भव्य सुंदरकांड का पाठ*

(मनोज पुरोहित/मनोज उपाध्याय/राजेश डामर)

थांदला । ब्राह्मण समाज थांदला के वरीष्ट सदस्य एवम उपाध्याय परिवार के वट व्रक्ष श्री लालशंकर जी उपाध्याय का   आयु में  06 अगस्त 2025 अंनत चतुर्दशी की उत्तम। तिथि को प्रभु मिलन हो गया था । 

*ब्राह्णण समाज के वटव्रक्ष थे  श्री उपाध्याय 

स्व .श्री लालशंकरजी सरल स्वभाव के धनी थे, ।आपका   जन्म 04/0 3/1943 को खवासा में में जन्म हुआ  आप के पिता मुरलीधर जी जो पुजारी के साथ एक कृषक भी थे दो पुत्र  लालशंकर एवं बद्रीलाल दोनों पुत्र सु संस्कारी होकर ज्येष्ठ पुत्र  लालशंकर कृषक के साथ शिक्षक भी थे । 

*गुरु के रूप में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका,  क़ई छात्रों को दीखाया सद्मार्ग*

 1983 में आप की प्रथम पदस्थापना  मथवाड़ में  आलीराजपुर  में हुई ।आपने के  झाबुआ जिले के मोरझरी काकनवानी, बालावास तक मे पदस्थ रहकर अपनी सेवाएं दी ।

उन दिनों  वर्तमान की तरह यातयात के साधन ओर  बसे नहीं होने के कारण  आप प्रतिदिन  सायकल से  अपने कर्तव्य स्थल पर  जाते थे । समय के पाबंद श्री उपाध्याय जी सर्दी ,गर्मी ,बरसात के मौसम में भी सदैव समय पर कर्तव्यस्थल पर पहुचकर अपने छात्र छात्राओं को भी समय पालन कि नसीहत देते थे । आपकि दी हुई  शिक्षा और प्रेरणा से क़ई छात्र छात्राएं वर्तमान मे चिकित्सक, इंजीनियर,  एसडीएम, तहसीलदार शिक्षक और पुलीस विभाग सहित क़ई विभागों में उच्च पदों पर आसीन हे । 42 वर्षो तक सेवाएं देते हुए 2005 में मियाट्टी से प्रधान अध्यापक के रूप में सेवानिवृत्त हुए।


*गोसेवा, पोधारोपन कर  प्रकृति प्रेम का दिया सन्देश*

शिक्षक के साथ  ही साथ एक गो पालक के रूप में  प्रतिदिन गायों की सेवा करने खजूरी जाते। थे 50 सालों से गो सेवा  स्वयं ही करते थे । वहीं अपने जीवनकाल में आपने प्रकृति सेवा कर क़ई पौधे लगाये जो आज बडे फलदार ओर छायादार व्रक्ष के रूप में आपकी स्मृति के प्रतीक है । 

*धर्म कर्म ओर सामाजिक गतिविधियों में रहे अग्रणी

धार्मिक ,सामाजिक कार्यो में अग्रणी स्व श्री लालशंकर जी उपाध्याय आजीवन नगर के 

 श्री गणेश मंदिर, गुरुद्वारा  ओर समस्त मंदिरों से जुड़कर न सिर्फ़ भक्ति और सेवाभाव से जुड़े रहे बल्कि इन मंदिरों के नवनिर्माण ओर जीर्णोद्धार में अपनी महती भूमिका अदा की । वही ब्राह्मण समाज की गतिविधियों में भी सक्रिय रहकर समाज हित के कार्यो में योगदान दिया हे  ।

*उपाध्याय परिवार पुण्यतिथि  पर कर  रहा आयोजन*

उल्लेखनीय हे कि स्व श्री उपाध्यायजी की 25 सितम्बर शुक्रवार को प्रथम पुण्यतिथि हे  इस अवसर पर 

उपाध्याय परिवार  के सतीश जी उपाध्याय एवं  जानेमाने अधिमान्य पत्रकार श्री,मनोज उपाध्याय  एव उपाध्याय परिवार के द्वारा  स्व श्री  लालशंकरजी की आत्मशांति के निमित अन्तचतुर्दशी के  अवसर पर प्रात:  11 बजे  पूजन तर्पण  के उपरांत रात्रि 08 :30 बजे थांदला के प्रसिद्ध रामायण मंडल के द्वारा सुंदरकांड पाठ का आयोजन रखा गया हे।  जिसमे धर्मप्रेमी नगरवासी सादर आमंत्रित हे।

 



 

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