*अधिवक्ता निलेशचंदसिह कुशवाह के प्रयासों से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में पेटलावद जज एस एल भगोरा ने सुनाया महत्वपूर्ण फैसला*
*2.40 लाख के चेक के मामले में आरोपी को एक वर्ष का सश्रम कारावास, ₹4.27 लाख प्रतिकर का आदेश*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद। चेक अनादरण के एक महत्वपूर्ण मामले में पेटलावद न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी विष्णु पिता अंबराम मेड़ा नि रुपारेल को परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सोहनलाल भगोरा ने एक वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया। साथ ही आरोपी को परिवादी बैंक शाखा को कुल ₹4,27,619/- प्रतिकर एक माह के भीतर अदा करने का आदेश दिया है।
₹2.40 लाख का चेक हुआ था अनादरित’
परिवादी बैंक की और से अभिभाषक निलेशचंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी ने बैंक से प्राप्त ऋण की देनदारी के भुगतान के लिए ₹2,40,237/- का चेक जारी किया था। बैंक द्वारा चेक को भुगतान हेतु प्रस्तुत किए जाने पर खाते में अपर्याप्त धनराशि होने के कारण अनादरित हो गया। चेक बाउंस होने के बाद बैंक की ओर से अभिभाषक ने विधि अनुसार मांग सूचना पत्र भेजा व बैंक ने न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया।
बैंक अभिभाषक ने परिवादी बैंक की ओर से दस्तावेजी साक्ष्य प्रमाणित करवाए व बैंक के शाखा प्रबंधक अपूर्व श्रीवास्तव के कथन करवाए व विधिक पक्ष रखा तथा अभिभाषक द्वारा प्रस्तुत तर्कों व मा उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय के न्यायदृष्टांतो से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी को परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत दोषी पाते हुए 1 वर्ष का सश्रम कारावास व ₹4.27 लाख प्रतिकर राशि 1 माह में बैंक को अदा करने का निर्देश दिया व प्रतिकर राशि समय पर जमा नहीं करने पर आरोपी को दो माह के अतिरिक्त करावास की सजा दी. प्रकरण में बैंक की ओर से अभिभाषक निलेशचंद्र सिंह ने पैरवी की।
*शाखा प्रबंधक ने की अपील*
बैंक शाखा प्रबंधक अपूर्व श्रीवास्तव ने बैंक उपभोक्ताओ व उधारकर्ताओ से अपने ऋण खातो के नियमित संचालन व समय पर भुगतान कर उक्त असहज स्थिति से बचने की अपील की है.

.jpg)

.jpg)
















