*स्वर्गीय मोतीलाल जी मूलेवा की स्मृति में आयोजित हुई विशेष प्रवचन सभा*
*संत शिरोमणि वेदांत सागरजी के मुखारविंद से बही धर्म ओर ज्ञान की गंगा*
*मुलेवा परिवार ने लिया गुरुदेव का आशीर्वाद किया अभिनंदन स्वागत*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद।निमाड़ के प्रसिद्ध संत व कथावाचक पूज्य वेदांत सागर जी ने पेटलावद में आयोजित एक विशेष प्रवचन सभा में कहा कि हमारा शरीर प्रभु का प्रसाद है और इसका उचित उपयोग करने से यह पुण्य प्रसाद में बदल जाता है। जिस आत्मा के पुण्य को परिवार, समाज और पीढ़ियाँ याद रखती हैं, वह वास्तव में पुण्यशाली होती है। स्वर्गीय मोतीलालजी मुलेवा की आत्मा पुण्यशीला थी, तभी तो उनका परिवार आज समृद्ध और सुखी है।
संत श्री ने जीवन में अनैतिक कार्यों, मादक पदार्थों के सेवन और निंदा-चुगली से बचने का संदेश देते हुए कहा कि जो व्यक्ति इन तीन पाप कार्यों से दूर रहता है, वह जीवन में कभी खलनायक नहीं बनता है। उन्होंने व्यक्ति को पुण्यशाली बनाने वाले तीन प्रमुख कार्यों का विशेष उल्लेख किया। इनमें संसार के वैभव को त्यागने वाले संतों को भोजन, दवा और वस्त्र उपलब्ध करवाना, लाचार, अपंग, श्रमहीन और असहाय को सहायता देना, तथा फलदार, छायादार और पर्यावरण की रक्षा करने वाले तीन तरह के पेड़ लगाना शामिल है।
*मुलेवा परिवार ने किया संत श्री का सम्मान*
उन्होंने यह भी कहा कि धर्म स्थान पर पैसा लगाना आपका कर्तव्य है, इसलिए इस पुण्य कार्य का नाम न दें और पाप से बचने के लिए निरंतर पुण्य करते रहें।
कार्यक्रम के दौरान सीरवी समाज के कोटवार नारायण पटेल व मुलेवा परिवार के प्रमुख गोविंद मुलेवा, अनिल मुलेवा ने संत वेदांत सागर जी का सम्मान किया और उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया। परिवार की ओर से जितेंद्र मेहता ने आभार प्रदर्शन किया तथा स्वर्गीय मोतीलाल मुलेवा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। संचालन अनुराग गौड़ ने किया।
इस अवसर पर सीरवी समाज, जैन समाज, ब्राह्मण समाज के परिजन, जनप्रतिनिधि, कई इष्ट-मित्र और अन्य समाज के प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे।

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