*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर तहसील स्तरीय बांसुरी वादन यात्रा एवं प्रतियोगिता का हो रहा आयोजन*
*भीलांचल की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा मंच, बांसुरी वादकों की प्रतिभा का होगा सम्मान*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भीलांचल की पारंपरिक एवं सांस्कृतिक विरासत देशी बांसुरी (वाहली) के संरक्षण, संवर्धन और बांसुरी वादकों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से तहसील स्तरीय बांसुरी वादन यात्रा एवं प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है।
*जन्माष्टमी के पावन पर्व पर आयोजन होगा*
आयोजन 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को प्रातः 10:30 बजे से भगवान बिरसा मुंडा जी की प्रतिमा के पास, पेटलावद में होगा। कार्यक्रम का आयोजन आजाद युवा मित्र मंडल, पेटलावद एवं चंद्रशेखर आजाद जी द्वारा किया जा रहा है। इसमें जनजातीय शिक्षा एवं समाजोत्थान समिति, पेटलावद का सहयोग रहेगा।
*पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करना ही उद्देश्य*
आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता का उद्देश्य क्षेत्र की पारंपरिक बांसुरी वादन कला को प्रोत्साहित करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। कार्यक्रम में बांसुरी वादकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। प्रतिभागियों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम के संरक्षक गौरसिंह कटारा, युवा नेतृत्व, पेटलावद क्षेत्र हैं।
*आयोजनकर्ताओं ने की अपील*
आयोजन में सुरसिंह मीणा संयोजक, सुरेश अड़ सह-संयोजक, राजू सोलंकी पंजीयन प्रमुख, सुरज अड़ पंजीयन सह-प्रमुख एवं राजेश मेड़ा मीडिया प्रभारी की भूमिका निभा रहे हैं।
आयोजकों ने क्षेत्र के बांसुरी वादकों एवं संस्कृति प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता कर भीलांचल की पारंपरिक बांसुरी कला को सहेजने और आगे बढ़ाने की अपील की है।
*बांसुरी की मधुर तान, हमारी संस्कृति की पहचान” के संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम जन्माष्टमी पर्व को सांस्कृतिक रंग प्रदान करेगा*

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