*जाते जाते दो जिंदगियों को रोशन कर गए स्व.श्री बसंतीलाल जी पटवा*
*मानव सेवा की बने मिसाल,पटवा परिवार ने करवाया नेत्रदान*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद (नि.प्र)दुःख और शोक की घड़ी में भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना और किसी के अंधेरे जीवन को रोशन करना ही सच्ची मानवता है। पेटलावद निवासी *पटवा परिवार* ने ऐसा ही एक अनुकरणीय और प्रेरक उदाहरण पेश किया है। *88 वर्षीय स्व. श्री बसंतीलाल जी पटवा (सुपुत्र स्व. श्री समरथमल जी) के स्वर्गवास उपरांत उनके सुपुत्र श्री संजय जी व संदीप जी पटवा एवं शोकाकुल परिवार* ने एक अत्यंत सराहनीय निर्णय लेते हुए उनका *नेत्रदान* कराया। यह गीता भवन न्यास समिति, बड़नगर के माध्यम से अभातेयूप के निर्देशन में तेयुप पेटलावद के विशेष सहयोग (मार्गदर्शन) से उक्त नेत्रदान का क्रम संपन्न हुआ !
*अंधेरी जिंदगी को मिला नया सवेरा*!!
स्व. बसंतीलाल जी के देवलोकगमन के तुरंत बाद, परिवार ने *पूज्य पिताजी की स्मृतियों को अमर रखने और मानवता की सेवा के उद्देश्य से नेत्रदान की सहमति दी*।
निर्णय के क्रियान्वयन स्वरूप *नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. दादरवाल एवं उनकी टीम के सदस्य संजय कुमावत* ने पूरी संवेदनशीलता और सम्मान के साथ नेत्र उत्सर्जन का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया। स्व. बसंतीलाल जी की आँखें अब दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन से अंधकार मिटाकर उन्हें एक नया सवेरा देंगी।
*समिति ने जताया आभार*!!
पटवा परिवार के इस अनुकरणीय और परोपकारी निर्णय पर गीता भवन न्यास समिति के अध्यक्ष श्री हरिकिशन मेलवानी ने गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "गहरे शोक के समय में भी ऐसा परमार्थ का विचार रखना हर नागरिक के लिए प्रेरणादायक है।" आपने आगे कहा कि यह पुनीत कार्य समाज के लिए एक महान संदेश है कि हमारी आँखें मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन का सहारा बन सकती हैं।
*प्रेरक मिसाल*.....
आइए, इस प्रेरक मिसाल से सीख लेते हुए हम सभी भी नेत्रदान का संकल्प लें और समाज को दृष्टिहीनता से मुक्त बनाने में अपना अकल्पनीय योगदान दे।

.jpg)

.jpg)
















