*कन्या भोज, शस्त्र पूजन के साथ पंचकुंडीय यज्ञ की हुई पूर्णाहुति*
*गायत्री शक्तिपीठ पेटलावद में हुआ भव्य आयोजन*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ पेटलावद में गायत्री परिजनों द्वारा श्रद्धा, भक्ति एवं अनुशासन के साथ किए गए साधना-अनुष्ठानों की पूर्णाहुति पंच कुंडीय यज्ञ के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गायत्री परिजनों ने यज्ञ में सहभागिता कर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां अर्पित कीं तथा विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और जन-जन के मंगल की कामना की।
नवरात्रि के दौरान अनेक परिजनों ने अपनी श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार गायत्री मंत्र जप एवं साधना-अनुष्ठान किए। पूर्णाहुति के अवसर पर परिजनों ने सामूहिक यज्ञ में भाग लेकर अपनी साधना को पूर्ण किया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा और साधकों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
दशहरे पर हुआ शस्त्र पूजन
विजयादशमी के पावन अवसर पर कार्यक्रम में कन्याओं के हाथों शस्त्र पूजन कराया गया। मंच से शस्त्र पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि शस्त्र शक्ति, साहस और सुरक्षा के प्रतीक हैं, लेकिन उनके उपयोग की अपनी मर्यादा होती है। शस्त्रों का उपयोग अधर्म के विनाश, असहाय एवं निर्बल लोगों की रक्षा तथा राष्ट्र की सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए। शक्ति का उद्देश्य किसी को भयभीत करना नहीं, बल्कि अन्याय का प्रतिकार करना और धर्म एवं न्याय की स्थापना करना है।
कन्या पूजन कर लिया आशीर्वाद
यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात कन्या पूजन एवं कन्या भोज का आयोजन किया गया। गायत्री परिजनों ने श्रद्धापूर्वक कन्याओं का पूजन किया, उन्हें उपहार भेंट किए तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर कन्या सम्मान, नारी शक्ति और भारतीय संस्कृति में कन्याओं के महत्व का संदेश दिया गया।
जन-जन को गायत्री साधना से जोड़ने का आह्वान
कार्यक्रम के समापन अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ की ओर से उपस्थित परिजनों से आह्वान किया गया कि वे अपने आसपास के लोगों को शक्तिपीठ से जोड़ें तथा उन्हें गायत्री मंत्र जप, नियमित साधना और सद्विचारों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करें। साथ ही परिवार एवं समाज में आध्यात्मिक चेतना, संस्कार और सेवा भावना का विस्तार करने का संकल्प लेने की प्रेरणा दी गई।
शारदीय नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में परिजनों की सहभागिता और साधना-अनुष्ठानों की पूर्णता के साथ गायत्री शक्तिपीठ पेटलावद में संपन्न यह आयोजन श्रद्धा, संस्कार, राष्ट्रभावना एवं आध्यात्मिक जागरण का संदेश दे गया।

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