मुख्यमंत्री की सभा के बाद कॉलेज ग्राउंड की स्थिति बदतर
खेल मैदान को बनाया राजनीतिक सभा का अड्डा
मनोज उपाध्याय
प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के थांदला दौरे के बाद आज एक सप्ताह से ज्यादा का समय हो चुका है पूरा मैदान कीचड़ और गंदगी से भरा पड़ा है खिलाड़ी अपने नियमित खेल अभ्यास के लिये तरस रहे है खेल मैदान की दुर्गति के लिए कौन जिम्मेदार है??
मुख्य रूप से स्थानीय प्रशासन खेल विभाग के अधिकारी और कार्यक्रम के इवेंट मैनेजर सीधे तौर पर जवाबदार होते हैं। किसी भी वीआईपी या मुख्यमंत्री के दौरे के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जाती हैं, लेकिन दौरा खत्म होते ही मैदान को लावारिस स्थिति में छोड़ दिया जाता है।इस बदहाली और लापरवाही के मुख्य जवाबदार कौन है?
मुख्यमंत्री के आयोजन के लिये कॉलेज मैदान पर विशालकाय वाटरप्रूफ टेंट,मंच और वीआईपी लाउंज बनाए गए थे। टेंट लगाने के लिए मैदान में गहरे गड्ढे खोदे गए थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद टेंट निकालने वाली एजेंसियां गड्ढों को खुला छोड़ अपना सामान समेट कर रवाना हो गई किंतु स्थानीय प्रशासन के आला अधिकारी द्वारा आज तक इन गड्ढों को समतल कराने की सुध नहीं ली। खेल और युवा कल्याण विभाग भी मूकदर्शक बन मैदान को लावारिस हालत में छोड तमाशबीन की तरह तमाशा देख रहा है
क्या जिला प्रशासन या स्थानीय प्रशासन ऐसे वीआईपी राजनीतिक कार्यक्रम कॉलेज मैदान में आयोजित करते समय रखरखाव की शर्तें तय नहीं करता आज स्थिति यह है की मैदान खराब होने से स्थानीय खिलाड़ियों का अभ्यास रुक गया है, फिर स्थानीय प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
कार्यक्रम स्थल (कॉलेज मैदान पर)भारी वाहनों की आवाजाही से और इवेंट मैनेजर द्वारा ट्रकों की एंट्री सीधे मैदान पर मंच और टेंट का सामान लाने के लिए क्रेन द्वारा सीधे खेल के मैदान (पिच और रनिंग ट्रैक) पर चलाए गए थे जिससे मैदान का धंसना एवं बारिश होने से नमी के मौसम में भारी वाहनों के चलने से मैदान ऊबड़-खाबड़ हो गया है।
संपूर्ण मैदान में इवेंट मैनेजर्स खाने-पीने का सामान, प्लास्टिक की बोतलें, नुकीली कीलें और कांच के टुकड़े मैदान में ही छोड़ गए हैं। वही जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग वीआईपी सुरक्षा के चलते पूरे मैदान में बल्लियां गाड़कर बैरिकेडिंग की गई थी जो आज तक बड़े गड्ढे के रूप में देखी जा सकती है।
किसी भी राजनीतिक या अन्य आयोजन के लिए मैदान देने से पहले आयोजकों से मोटी सुरक्षा राशि जमा कराई जानी चाहिए। कार्यक्रम खत्म होने के 48 घंटे के भीतर मैदान को वापस समतल और साफ करने की समय-सीमा तय होना चाहिए भविष्य में मुख्यमंत्री या अन्य राजनीतिक रैलियों के लिए खेल मैदानों के बजाय कृषि उपज मंडी, मेला ग्राउंड या खुले प्रदर्शन स्थलों का उपयोग किया जाना चाहिए ताकि खिलाड़ियों का नुकसान न हो।
बहरहाल मुख्यमंत्रीजी के आयोजन को सम्पन्न हुवे एक सप्ताह से ज्यादा समय हो गया है कॉलेज का मैदान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है नगर में कोई तो जिम्मेदार होगा जो मैदान की सुध ले या फिर जो जनप्रतिनिधि उजले शांति के प्रतीक सफेद कपड़ों के शहंशाह बड़े रोब से इसी मैदान में निरीक्षण करने आए थे उनसे सादर निवेदन है की एक बार फिर से इस मैदान की सुध ले लो।

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