पेटलावद में महिला संस्कार शिविर में सात्विक जीवन और दान की महत्ता पर दिया विशेष मार्गदर्शन*

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पेटलावद में महिला संस्कार शिविर में सात्विक जीवन और दान की महत्ता पर दिया विशेष मार्गदर्शन*

 *पेटलावद में  महिला संस्कार शिविर में  सात्विक जीवन और दान की महत्ता पर दिया विशेष मार्गदर्शन*


(मनोज पुरोहित)


पेटलावद ।  श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय महिला संस्कार शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह शिविर आचार्य  उमेश मुनि जी महाराज साहब के बुद्ध पुत्र, धर्मदास गणनायक प्रवर्तक जिनेंद्र मुनि जी महाराज साहब की आज्ञानुवर्ती वरिष्ठ साध्वी  धैर्य प्रभा जी, पुण्य पूंज साध्वी  पुण्य शीला जी महाराज साहब एवं पेटलावद गौरव साध्वी अनुपम शीला जी महाराज साहब ठाणा 25 की पावन निश्राय में संपन्न हुआ।

 इस आध्यात्मिक आयोजन में प्रतिदिन 50 से अधिक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और संस्कारी जीवन जीने के महत्वपूर्ण पाठ सीखे।


शिविर के दौरान पेटलावद गौरव साध्वी महक श्री जी ने महिलाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि साधु-साध्वियों का संयम मार्ग श्रावकों और महिलाओं के सहयोग से ही पुष्ट होता है। उन्होंने साधना पथ पर चलने वाले संयमी आत्माओं के लिए निर्धारित नियमों की जानकारी देते हुए विशेष रूप से शुद्ध आहार और पानी की शुद्धि पर जोर दिया। साध्वी जी ने स्पष्ट किया कि भोजन और जल के निर्माण तथा रखरखाव में असावधानी होने पर कई बार अशुद्धियां रह जाती हैं, जिससे अनजाने में जीवों की हिंसा हो सकती है और इसके लिए प्रायश्चित लेना पड़ता है। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे साधु-साध्वियों को दान में दी जाने वाली हर सामग्री का अत्यंत गहन निरीक्षण करें और पूरी स्वच्छता सुनिश्चित करें, ताकि संयमी आत्माओं की साधना में कोई बाधा उत्पन्न न हो।

साध्वी जी ने जीवन में समृद्धि और पुण्य संचय के सूत्रों पर प्रकाश डालते हुए उन कारणों का भी उल्लेख किया जिनसे घर से लक्ष्मी रूठ जाती है और पुण्य का स्तर घटता है। उन्होंने बताया कि जिस घर में याचक खाली हाथ लौटता है, जहाँ देव, गुरु और धर्म की निंदा की जाती है, अथवा जहाँ माता-पिता का अपमान या वृद्धों की उपेक्षा की जाती है, वहाँ सुख-शांति नहीं रहती। इसी प्रकार बड़े-बुजुर्गों के सामने ऊंची आवाज में बोलना, उनकी पुकार अनसुनी करना, धैर्य व सहनशीलता खोना और घर के बीमार सदस्यों को अनुकूल आहार न देना भी नकारात्मकता का कारण बनता है। उन्होंने धर्म को ढोंगी कहने, धार्मिक कार्यों में बाधा डालने, बड़े-बुजुर्गों को अकेला छोड़कर अलग होने, माता-पिता के उपकारों को भूलने, आवश्यकता से अधिक भोजन करने, मटकी से सीधे पानी पीने तथा उल्टा सोने या उल्टे हाथ से भोजन करने जैसी आदतों को त्यागने का परामर्श दिया।

शिविर के समापन अवसर पर सभी महिलाओं को प्रभावना वितरित की गई और स्वल्पाहार का आयोजन हुआ। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में महिला मंडल, बहुमंडल, बालिका मंडल और अखिल भारतीय चंदना श्राविका संगठन की डुंगर प्रांतीय ईकाई का सराहनीय सहयोग रहा। शिविर के दौरान प्रतिदिन आयोजित प्रश्न मंच प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया। आयोजन की सफलता और महिलाओं के उत्साह को देखते हुए साध्वी  पुण्य शीला जी महाराज साहब ने शिविर को दो दिन और बढ़ाने की स्वीकृति प्रदान की है।

 



 

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