*गायत्री शक्तिपीठ पेटलावद का स्थापना दिवस*
*शताब्दी अनुयाज के तहत 60 घरों में हुआ गृह-गृह गायत्री यज्ञ और तुलसी पौध स्थापना*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद। स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ का वार्षिक स्थापना दिवस ७ जून को श्रद्धा, उत्साह और सेवा संकल्प के साथ मनाया गया। माता भगवतीदेवी शर्मा की जन्म शताब्दी, अखंड दीप प्राकट्य और परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य की तप साधना के 'शताब्दी अनुयाज संकल्प' के अंतर्गत इस वर्ष एक वृहद और अनूठा अभियान चलाया गया। शांतिकुंज हरिद्वार के निर्देशानुसार तैयार कार्य योजना के तहत नगर के ६० विभिन्न घरों में एक साथ गायत्री यज्ञ संस्कार, देव स्थापना और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ तुलसी पौधों की स्थापना की गई।
पर्यावरण और हरितिमा संवर्धन का संदेश
गायत्री शक्तिपीठ के प्रमुख ट्रस्टी के. एस. राठौर एवं जिला युग प्रवक्ता विनोद जायसवाल ने संयुक्त रूप से बताया कि प्रतिवर्ष ७ जून को स्थापना दिवस के अवसर पर गृह-गृह गायत्री यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष के आयोजन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण शुद्धि, नारी जागरण, संस्कारों का बीजारोपण, हरितिमा संवर्धन और वातावरण परिशोधन रहा। इस महाअभियान के तहत ६० घरों में देवस्थान की स्थापना की गई, ६० तुलसी के पौधे रोपे गए और कुल १२ विभिन्न संस्कार (जैसे पुंसवन, नामकरण, अन्नप्राशन आदि) संपन्न कराए गए।
नारी शक्ति ने संभाली कमान, विभिन्न शहरों से जुटे यज्ञाचार्य
इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि नारी जागरण के संकल्प को चरितार्थ करते हुए २० से अधिक प्रज्ञापुत्रियों (महिलाओं) ने यज्ञाचार्य के रूप में मुख्य भूमिका निभाई और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराए। इस वृहद अनुष्ठान को सफल बनाने के लिए उज्जैन, रतलाम, जोबट, नागदा, बांगरोद, झाबुआ, धार, पेटलावद, सारंगी, थांदला और खवासा जैसे विभिन्न क्षेत्रों से अनुभवी यज्ञाचार्य और टोली नायक पेटलावद पहुंचे थे।
शक्तिपीठ पर हुआ ५ कुंडी यज्ञ
एक ओर जहाँ नगर के ६० घरों में आहुतियां डल रही थीं, वहीं दूसरी ओर मुख्य गायत्री शक्तिपीठ परिसर में ५ कुंडी गायत्री महायज्ञ का भव्य आयोजन किया गया। इस मुख्य यज्ञ को गायत्री परिवार के जिला समन्वयक घनश्याम वैरागी ने वैदिक रीति-रिवाज और पूर्ण विधि-विधान के साथ संपन्न करवाया। यज्ञ के माध्यम से विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना की गई।
स्नेह भोज के साथ हुआ समापन
इस भव्य धार्मिक और सामाजिक उत्सव को सफल बनाने में स्थानीय मातृशक्ति सहित गायत्री परिवार के सभी परिजनों ने अत्यंत उत्साह, ऊर्जा और समर्पण के साथ अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम के अंतिम चरण में शक्तिपीठ परिसर पर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और अतिथियों के लिए एक विशाल स्नेह भोज (महाप्रसादी) का आयोजन किया गया। इसके पश्चात बाहर से पधारे सभी यज्ञाचार्यों और कार्यकर्ताओं को भावभीनी विदाई दी गई।

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