गौवंश को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा और केंद्रीय कानून की मांग: पेटलावद में गौभक्तों और संतों ने भरी हुंकार*

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गौवंश को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा और केंद्रीय कानून की मांग: पेटलावद में गौभक्तों और संतों ने भरी हुंकार*

 *गौवंश को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा और केंद्रीय कानून की मांग: पेटलावद में गौभक्तों और संतों ने भरी हुंकार*

*देशभर की 4205 तहसीलों में एक साथ सोपा  ज्ञापन*

(मनोज पुरोहित)

पेटलावद। भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला रही वेदलक्षणा गौमाता को संवैधानिक संरक्षण दिलाने और उन्हें 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की मांग अब राष्ट्रव्यापी अभियान का रूप ले चुकी है। इसी कड़ी में 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के अंतर्गत पेटलावद तहसील के समस्त गौभक्तों, साधु-संतों और प्रबुद्ध नागरिकों ने एकजुट होकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार अंकिता भिड़े को  सौंपा।


*ऐतिहासिक रूप से विरोध दर्ज*

 विदित हो की आज 27 अप्रैल सोमवार  को  देशभर की 4205 ओर प्रदेश की 428 तहसीलों में एक साथ गोभक्तो,ओर संतों ने एकसाथ उक्त ज्ञापन सौंपा हे जो अपने आपमें एक रेकॉर्ड हे। 

 *नंदी बाबा की प्रेरणा से निकाली भव्य रैली*



आंदोलन की शुरुआत स्थानीय शंकर मंदिर पर भारी संख्या में गौप्रेमियों के एकत्र होने से हुई, जहाँ गौमाता और नंदी बाबा की प्रेरणा से संचालित इस अभियान के उद्देश्यों पर चर्चा की गई। मंदिर परिसर से एक विशाल रैली निकाली गई, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंची। इस दौरान पूरा मार्ग 'गौ माता की जय' और गौवंश संरक्षण के नारों से गुंजायमान रहा।

तहसील कार्यालय पहुंचने पर आयोजित सभा में डॉ. सुखराम कतीजा ने ज्ञापन का वाचन किया। ज्ञापन में इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 में स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद आज भी देशी गौवंश सड़कों पर दुर्घटनाओं, तस्करी और भूख का सामना कर रहा है। राष्ट्रपति को संबोधित इस पत्र में मांग की गई कि गौवंश को 'राष्ट्रमाता' या 'राष्ट्र आराध्या' के रूप में संवैधानिक मान्यता प्रदान की जाए और इसके लिए एक समर्पित 'केंद्रीय गौसेवा मंत्रालय' की स्थापना हो। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों ने भी गौवंश को 'विधिक व्यक्ति' मानने की अनुशंसा की है, अतः अब समय आ गया है कि संपूर्ण भारत में एक समान और कठोर केंद्रीय कानून लागू किया जाए ताकि गौ-वध और तस्करी को संज्ञेय व गैर-जमानती अपराध बनाया जा सके।



गोप्रेमी के साथ संत आशाराम आश्रम के जीतू भाई ने बताया कि ज्ञापन में केवल कानूनी पक्ष ही नहीं, बल्कि गौवंश के आर्थिक और सामाजिक महत्व पर भी विस्तृत सुझाव दिए गए हैं। गौभक्तों ने मांग की है कि प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर 'नंदीशाला' और जिले में एक 'आदर्श गौ अभ्यारण्य' स्थापित किया जाए। साथ ही, राजमार्गों पर दुर्घटनाग्रस्त होने वाले पशुओं के लिए 'गौ-वाहिनी एम्बुलेंस' और ट्रॉमा सेंटरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है। शिक्षा के क्षेत्र में 'गौ-विज्ञान' को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने और चारे की कालाबाजारी रोकने के लिए 'चारा सुरक्षा कानून' बनाने की बात भी प्रमुखता से उठाई गई। रैली के अंत में महेंद्र अग्रवाल ने सभी उपस्थित गौभक्तों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में क्षेत्र के संत समाज और जागरूक नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस पुनीत कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।

 



 

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