*पूर्व नप अध्यक्ष ने की मिसाल पेश, सात परिवारों ने की प्रभावना वितरित*
*महावीर जन्म कल्याणक पर हुई औली जी पर्व की आराधना*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद। नगर में इन दिनों समग्र जैन समाज की सहभागिता के साथ औली जी पर्व की आराधना जप, तप और ध्यान के माध्यम से बड़े ही उत्साहपूर्वक की जा रही है। चैत्र मास के इस पावन पर्व के सातवें दिन प्रभु महावीर का जन्म कल्याणक दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
इस विशेष अवसर पर जैन समाज के कई तपस्वियों ने मात्र उबला हुआ और रूखा-सूखा भोजन ग्रहण कर भगवान महावीर के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। सातवें दिन की आराधना सम्यक दर्शन को समर्पित रही, जिसमें तपस्वियों ने 'नमो दंसणस' पद की स्तुति की और सफेद वर्ण के आहार का सेवन किया। इस दिन सात बिना नमक के और उनचास नमक वाले आयंबिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य लाभार्थी अनिल कुमार तेजमल मुणत परिवार रहे।
*सात परिवारों ने लिया लाभ*
प्रभु महावीर के जन्म कल्याणक की खुशी में कुल सात परिवारों ने प्रभावना वितरण का लाभ लिया, जिनमें अनिल मुणत, संगीता प्रदीप लोढ़ा, तीजा देवी राजेंद्र कुमार मेहता, विनोद कुमार हेमराज मेहता (मंदसौर), दीपेश सोहनलाल मुणत, शांतिलाल वछराज भंडारी और एक गुप्त दानदाता परिवार शामिल रहे। इस दौरान स्थानकवासी समाज की महिलाओं ने भी अपनी उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कीं।
नगर में चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान में न केवल तपस्वी धर्म की गंगा में डुबकी लगा रहे हैं, बल्कि सेवा कार्य करने वाले और भोजनशाला में अपनी सेवाएं देने वाले सदस्य भी पूरे उत्साह से जुटे हुए हैं।
*पूर्व अध्यक्ष ने किया सम्मान*
पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष संगीता विनोद भंडारी ने एक आदर्श मिसाल पेश करते हुए भोजन बनाने वाले कर्मियों और सहायक सेवादारों का तिलक लगाकर व प्रभावना देकर सम्मान किया। पर्व के बीते दिनों में भी भक्ति का यही रंग देखने को मिला, जहाँ पांचवें दिन 'णमो लोए सव्व साहूणं' पद की आराधना के साथ काले वर्ण के अन्न का उपयोग किया गया, वहीं छठे दिन 'णमो णाणस' पद की आराधना कर तपस्वियों ने निर्मल ज्ञान की प्राप्ति हेतु सफेद वर्ण के अन्न और ध्यान का मार्ग चुना।
*इन परिवारों ने निभाई भूमिका*
पांचवें और छठे दिन भी बड़ी संख्या में आयंबिल तप संपन्न हुए, जिनमें आजाद कुमार कन्हैयालाल झालोका और झमक लाल ताराचंद भंडारी परिवार ने लाभार्थी के रूप में अपनी भूमिका निभाई। साथ ही आजाद झालोंका, प्रकाश समरथ मल सोलंकी, जीवनलाल तेजमल मुणत और गौरव रविंद्र कटारिया जैसे परिवारों ने प्रभावना का लाभ लेकर इस धर्म उत्सव को और अधिक गरिमामय बनाया।

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