रिश्ते बिगड़ने का मुख्य कारण है क्रोध--पन्यास प्रवर योगरुचि विजय जी*

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रिश्ते बिगड़ने का मुख्य कारण है क्रोध--पन्यास प्रवर योगरुचि विजय जी*

 *रिश्ते बिगड़ने का मुख्य कारण है क्रोध--पन्यास प्रवर योगरुचि विजय जी*

*मालवा भूषण आचार्य भगवंत श्री नवरत्न सागर सूरीश्वर जी महाराज साहेब की 10 वीं पुण्यतिथि तप जप के साथ मनाई जावेगी*

(मनोज उपाध्याय/मनोज पुरोहित)

झाबुआ। स्थानीय जैन तीर्थ श्री रीषभदेव बावन जिनालय पर विराजित आचार्य भगवंतश्री जिनसुंदर सुरीश्वर जी महाराज साहेब के सुशिष्य पन्यास प्रवर श्री योगरुचि विजय जी महाराज साहेब ने मंगलवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि रिश्ते बिगडऩे का मुख्य कारण अगर कोई है तो वह है क्रोध। क्रोध केआने पर बरसों के रिश्ते क्षण भर में बिगड़ जाते हैं। क्रोध से जीव अनंतकाल का पुण्य भी नष्ट कर बैठता है। अतः जीव को क्रोध पर अंकुश रखना आवश्यक है।


पुज्य पन्यास प्रवर श्री ने कहा कि अनंतजीव योनि के पश्चात अनंतकाल के बाद एवं अनंत पुण्य राशि के एकत्रित होने पर यह मानव भव की प्राप्ति हुई है। दुर्लभ से दुर्लभ मनुष्य भव तो प्राप्त हो गया पर हमें यह फलित कितना हुआ है इसका चिंतन हमें करना है।

यदि आज हमने इसका चिंतन नहीं किया तो पुनः अनंतकाल तक हमें यह मिलने वाला नहीं है।

पुज्य श्री ने कहा कि मानव भव को हम सार्थक  किस प्रकार कर सकते है,उसके बारे में बताया कि हमें एकाग्रचित होकर धर्म का अनुसरण करते हुए उस मार्ग पर हमें प्राणीधान के साथ चलना पड़ेगा तभी हम मोक्ष के अविचल सुख को प्राप्त कर सकते हैं।

*आचार्य श्री की 10 वी पुण्यतिथि पर होंगे आयोजन*

मालवा भूषण आचार्य भगवंत श्री नवरत्न सागर सूरीश्वर जी महाराज साहेब की 10 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर बुधवार को स्थानीय श्री ऋषभदेव 52 जिनालय पर प्रातः 9.30 बजे श्रीसंघ की ओर से गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया है। साथ ही पन्यास प्रवर श्री योगरुचि विजय जी महाराज साहेब जी के मंगल प्रवचन का आयोजन भी होगा। दोपहर को 1 बजे श्री सद्गुरु गोशाला पर गायों को आहार कराया जाएगा। 52 जीनालय पर दोपहर 2 से 3 बजे तक सामूहिक सामायिक एवं जाप का आयोजन भी किया गया है। श्री संघ के अध्यक्ष संजय मेहता वरिष्ठ मनोहरलाल भंडारी, राजेन्द्र प्रसाद मेहता यशवंत भंडारी हुकमीचंद छाजेड़, सोहनलाल कोठारी ,धर्मचंद मेहता ,मनोहरलाल छाजेड़ अभय धारीवाल तेजप्रकाश  कोठारी भरत बाबेल अनिल रुनवाल, रिंकू रुणवाल आदि नेअधिक से अधिक महानुभाव को पधारने की अपील की गई है

 



 

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