*भगवान शालिग्राम कि धूमधाम से निकली बारात
,तुलसी जी के साथ हुआ विवाह सम्पन्न,*
*देवउठनी ग्यारस पर तुलसी विवाह कर वर्मा परिवार ने लिया धर्म लाभ*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद।देवउठनी एकादशी के दिन पेटलावद शहर के वार्ड न. 12 सुभाष मार्ग में स्थित प्राचीन श्री राधा कृष्ण मंदिर पर सांयकाल तुलसी और विष्णु स्वरूप भगवान शालिग्राम का हिन्दू रीति रिवाजों के साथ विवाह सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालु तुलसी विवाह के साक्षी हुये।
*तुलसी व भगवान शालिग्राम ने लिये सात फेरे*
महिलाओं ने तुलसी के पौधे को चुनरी व सुहाग की वस्तुएं अर्पित कर पूजा की, साथ ही शालिग्राम के साथ फेरे करवाए। मंदिर में महिलाओं ने भजन-कीर्तन कर तुलसी के पौधे की पूजा अर्चना की। पंडित जी ने तुलसी शालिग्राम का मंत्रोच्चारण के साथ फेरे करवाए। इस तरह शालिग्राम एवं तुलसी का पाणिग्रहण संस्कार सम्पन्न हुआ। मंदिर के पुजारी पंडित रितेश जोशी साथ ही पंडित लक्ष्य भट्ट व गर्व जोशी ने विवाह की रस्म पूर्ण करायी। पंकज वर्मा व शिल्पा वर्मा ने भगवान शालिग्राम व तुलसी स्वरूप की भूमिका निभाई।
*निकली बारात, धूमधाम से हुआ विवाह*
भगवान शालिग्राम व तुलसी का बनोला निकालकर श्रद्धालु बाराती बनकर नाचते गाते नगर में आतिशबाजी करते हुए शंकर मंदिर से श्री राधा कृष्ण मंदिर आये, जिसमें महिलाओं की उपस्थित रही, साथ ही ढोल पर महिलाओं द्वारा नृत्य किया गया, कथा का वाचन हुआ व भगवान की आरती उतारी गई।
*तुलसी विवाह की यह मान्यता*
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जिस दंपत्ति को कन्या न हो वह आज के दिन तुलसी विवाह संपन्न कराते हैं तो उन्हें कन्यादान का पुण्य प्राप्त होता है और मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। साथ ही तुलसी जी और शालिग्राम की कृपा से विवाह में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं। शादीशुदा जीवन में भी खुशियां बनी रहती हैं। इस पर्व पर महिला श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर तुलसी विवाह का कार्य संपन्न कराया। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवउठनी एकादशी के दिन सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु 4 महीने के बाद निद्रा से जागते है मान्यता है कि इस दिन तुलसा विवाह के माध्यम से उनका आह्वान कर उन्हें जगाया जाता है और आज से संसार का कार्यभार संभालते है। इसी दिन से ही मांगलिक कार्यो शुभ लग्न की शुरुआत हो गई और शादी विवाह के कार्यक्रम भी संपन्न होने लगेंगे।

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