*कलयुगी श्रवण कुमार है संत ब्रह्मचारी कैलाशगिरी जी*
*दो हजार किलोमीटर की माता माही की परिक्रमा पर निकले संत ब्रह्मचारी कैलाश गिरी*
*अपनी मां को कंधे पर बिठाकर करवा चुके तीर्थ*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद।भगवा धारण किए,कपाट पर त्रिपुंड और मुख पर भोलेनाथ का नाम लिए,कंधे पर झोली टांगे अपने लक्ष्य की और बढ़ रहे संत कैलाश गिरी जी महाराज के त्याग और समर्पण को सुनकर हर कोई प्रणाम करता है।उनके द्वारा मां को कंधे पर बिठाकर तीर्थ करवाने का अद्वितीय कार्य किया गया है।
दरअसल माही माता की परिक्रमा कर रहे संत कैलाश गिरी ब्रह्मचारी महाराज के दर्शन हेतु श्रध्दालु पहुंच रहे हैं।28 अक्टूबर से अपनी यात्रा आरंभ करते हुए वे माही किनारे घुघरी ग्राम पहुंच गए हैं।माही माता की संपुर्ण यात्रा को लेकर संकल्पित संत श्री अपने गंतव्य को निरंतर बढ़ रहे है।उनके दर्शन हेतु श्रध्दालु पहुंच रहे हैं।बुधवार को वे चौकी मोवडी के पंचमुखी हनुमान जी महाराज मंदिर पर ठहरे।इस दौरान श्रध्दालु जन दर्शन हेतु पहुंचे।वही गुरुवार को घुघरी के माही माता किनारे स्थित हनुमान जी मंदिर पर पहुंचे।इसके बाद बामनिया क्षेत्र मे वे पहुंच गए हैं।
*जीवन को संतोषी बनाए*
अपनी यात्रा के बीच वे श्रध्दालुओ को मानव जीवन मे सुधार के अनेक प्रवचन दे रहे है।
उन्होंने उपस्थित भक्तो से कहा कि मानव जीवन में ईश्वर की आराधना के सिवा कुछ भी सत्य नहीं है।अनेक योनियों के बाद मानव शरीर मिला है तो उसको धर्म और माता-पिता गुरु की सेवा में लगाओ।सनातन मे मां को मंदिर और मां को ही पुजा बताया है।वही उन्होंने कहा कि मानव अपने जीवन को संतोषी जीवन बनाए।अपने आराध्य का सदैव ध्यान करे।दुख सुख से परे होकर जीवन जिए।
*माता को कंधे पर बिठाकर करवाए तीर्थ*
संत श्री कैलाश गिरी ब्रह्मचारी महाराज अपनी स्वयं की मां को कंधे पर बिठाकर भारत मे अनेक तीर्थों के दर्शन करवा चुके है।वर्ष 1996 से लेकर 2018 तक माता को तीर्थ करवाने में लगे रहे।21 वर्ष में उन्होंने भारत के विभीन्न तीर्थस्थल पर माता के दर्शन करवाए।इस दौरान की तीन वर्ष नर्मदा परिक्रमा भी करवाई।संत श्री का कहना है कि अब माही माता की सेवा में लगना है।

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