आध्यात्मिक लक्ष्मी आत्मा का ऐश्वर्य है : साध्वी ज्योतिषमति जी*

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आध्यात्मिक लक्ष्मी आत्मा का ऐश्वर्य है : साध्वी ज्योतिषमति जी*

 *आध्यात्मिक लक्ष्मी आत्मा का ऐश्वर्य है : साध्वी ज्योतिषमति जी*

(मनोज पुरोहित)

पेटलावद।लक्ष्मीजी पुण्य के अधीन होती है पूजा के नहीं। आज संसारी भौतिक लक्ष्मी के प्रयास मे न जाने क्या क्या करते है। पर भगवान महावीर ने आज के दिन आध्यात्मिक लक्ष्मी को प्राप्त कर जीवन को सार्थक कर लिया था। आध्यात्मिक लक्ष्मी आत्मा का एश्वर्य है। मिथ्यातत्वी सम्यक दर्शन से, श्रावक अणुव्रत से और संयमी आत्मा केवल ज्ञान से  अपना जीवन सुरक्षित व सार्थक कर लेते है। 

उक्त बात साध्वी ज्योतिषमति जी ने महावीर निर्माण कल्याण के अवसर पर धर्म सभा में कही।

आपने फरमाया कि जिसके पास केवल ज्ञान है वह संसार का सबसे धनी व्यक्ति है। केवल ज्ञान यानि सर्वस्व को पा लेना है। महावीर ने इसी उपलब्धि को पाया था। हमें क्षमा से क्रोध को, सरलता से वक्रता को और संतोष से तृष्णा को तथा सम्यकत्व से मिथ्या तत्व को एवं वितरागता से राग भाव को  जितना है। और केवल ज्ञान प्राप्त कर आत्माओं के अन्धकार को दूर करता है।  प्रभु महावीर ने साढे बारह वर्ष तक घोर तपस्या कि उसमे कई परिषह उपसर्ग सहे और मात्र 339 दिन आहार किया व सारे कर्मों को खपाकर केवल ज्ञान को उपलब्ध हुए।

आपने आगे कहा जहा गुरु व बुजुर्गों सम्मान होता है। जहां वाणी सुसंस्कृत होती है। जहां लड़ाई झगड़ा व क्लेश नहीं होता है। तथा धर्म का जहां प्रकाश के साथ  एकता व समर्पण के भाव होते है। जहां बारह मास प्रार्थना होती हो।  जहा लक्ष्मी को पाने के लिए  नहीं कोई गलत  प्रयास हो। उस घर में दरिद्रता का नही शुभ लक्ष्मी का वास होता है।

साध्वी गुणाश्री जी ने आज उत्तराध्यन सूत्र का वाचन पूर्ण किया। बुधवार को सामूहिक वीर स्तुति का समापन होगा। प्रतिदिन पचास से अधिक जपस्वि ने भाग लिया। महावीर कल्याणक के अवसर पर आज कई लोगों के तेले उपवास आदि की तपस्या की। कुमारी लविषा वोरा ने पांच उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।

 



 

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