किसानों की विशाल सभा के बाद भारतीय किसान संघ ने मुआवजे को लेकर सोपा ज्ञापन*

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किसानों की विशाल सभा के बाद भारतीय किसान संघ ने मुआवजे को लेकर सोपा ज्ञापन*

 *किसानों की विशाल सभा के बाद   भारतीय किसान संघ ने मुआवजे को लेकर सोपा ज्ञापन*

*बदनावर-डिमरावनी मार्ग: किसानों को मिल रहा कम मुआवजा*  

*भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 का हवाला, 4 गुना मुआवजा व पुनर्वास की मांग, नहीं माने तो आंदोलन की चेतावनी*

(मनोज पुरोहित)

*पेटलावद।  बदनावर पेटलावद - टिमरावनी मार्ग निर्माण के लिए अधिग्रहित हो रही कृषि भूमि के एवज में किसानों को कम मुआवजा दिए जाने का मामला सामने आया है। भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत जिला झाबुआ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत ग्रामीण भूमि का बाजार मूल्य का 4 गुना मुआवजा देने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी न होने पर लोकतांत्रिक व संवैधानिक आंदोलन किया जाएगा।




*की विशाल आम सभा आयोजित*


सोमवार 06 जुलाई को स्थानीय श्रद्धांजलि चौक पर भारतीय  किसान  संघ के बैनर तले विशाल आमसभा का आयोजन किया गया जिसमें भू अर्जन से प्रभावित होने वाले किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए। भारतीय  किसान संघ  ने सीएम के नाम विभिन्न मांगो को लेकर एक ज्ञापन पत्र  प्रशाशन की ओर एसडीएम  थांदला एवं प्रभारी  श्री भास्कर ग़ालचे, पेटलावद तहसीलदार  श्री अनिल बघेल, नायब तहसीलदार श्री  विजेंद्र कटारे , एसडीओपी सुश्री अनुरक्ति सबनानी, थाना प्रभारी निर्भयसिंह भूरिया की उपस्थिति  में ज्ञापन ग्रहण किया।


*क्या है मामला*  


किसान संघ द्वारा 6 जुलाई 2026 को CM को भेजे गए पत्र क्रमांक 62, पंजी.क्र. 14770-11 के अनुसार बदनावर-डिमरावनी मार्ग निर्माण परियोजना के तहत झाबुआ जिले के अनेक किसानों की कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है। संघ का आरोप है कि प्रशासन द्वारा भूमि का मूल्यांकन बहुत कम दरों पर किया जा रहा है, जबकि क्षेत्र में भूमि के प्रचलित बाजार दर उससे कहीं अधिक हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।


*कानून का हवाला*  


किसान संघ ने पत्र में लिखा कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में अधिग्रहित भूमि के बदले किसानों को बाजार मूल्य का 4 गुना तक मुआवजा दिया जाना अनिवार्य है। संघ ने कहा कि कृषि भूमि किसान की आजीविका, परिवार के भरण-पोषण व भविष्य की सुरक्षा का प्रमुख आधार होती है। भूमि जाने के बाद किसान आय के स्थायी साधन से वंचित हो जाता है, इसलिए उसे वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए।


*किसान संघ की 5 प्रमुख मांगें*  

1. अधिग्रहित की जा रही भूमि का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए।  

2. क्षेत्र में प्रचलित वास्तविक बाजार दरों के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाए।  

3. प्रभावित किसानों को उनकी भूमि के बाजार मूल्य का 4 गुना मुआवजा प्रदान किया जाए।  

4. जिन किसानों की आंशिक अथवा संपूर्ण भूमि अधिग्रहित हो रही है, उनके पुनर्वास एवं आजीविका प्रबंधन की व्यवस्था की जाए।  

5. मुआवजा निर्धारण प्रक्रिया में किसानों एवं उनके प्रतिनिधियों को शामिल कर पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।


*आंदोलन की चेतावनी*  

पत्र में किसान संघ ने लिखा है कि यदि उपरोक्त मांगों पर उचित व संतोषजनक निर्णय लेकर प्रभावित किसानों को न्याय नहीं दिया गया, तो भारतीय किसान संघ किसानों के हित में लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इसकी समस्त जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।

 



 

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