*बच्चों को को सिखाए जीवन जीने के गुर*
*बाल संस्कार शिविर का हुआ आयोजन*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद । जैन स्थानक भवन में आयोजित तीन दिवसीय बाल संस्कार शिविर का हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ, जिसमें 68 बच्चों ने सहभागिता कर जीवन को संस्कारवान बनाने की शिक्षा प्राप्त की। इस शिविर के अंतिम दिन साध्वी रेणुका जी ने बच्चों को सामायिक और प्रार्थना का महत्व समझाते हुए कहा कि सामायिक प्रतिदिन की जाने वाली वह विशेष प्रार्थना है जो मनुष्य को नरक द्वार से बचाकर आध्यात्मिक प्रकाश की ओर ले जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रार्थना पूरी सादगी से की जानी चाहिए, न कि श्रृंगार करके। सामायिक के दौरान मन और शरीर की स्थिरता अनिवार्य है और इस अवधि में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक साधन का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि प्राकृतिक वातावरण में की गई प्रार्थना ही सार्थक होती है। साध्वी जी ने गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य, उपाध्याय और साधु हमारे गुरु हैं जो स्वयं पांच महाव्रत धारण कर हमें भी अच्छा और सच्चा जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
*बच्चों को सफल जीवन के सूत्र दिए*
शिविर के समापन सत्र में साध्वी शिल्पा जी ने ज्ञान के सम्मान पर बल देते हुए कहा कि जो व्यक्ति ज्ञान और ज्ञान के साधकों का अनादर करता है, वह स्वयं ज्ञान से दूर हो जाता है। उन्होंने बच्चों को सफल जीवन के 10 सुनहरे सूत्र देते हुए बताया कि 'मैं' के स्थान पर 'हम' का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि 'मैं' अहंकार को जन्म देता है, जबकि 'हम' जुड़ाव पैदा करता है। उन्होंने बच्चों को माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का सदैव सम्मान करने, जिद न करने और बिना पूछे किसी की वस्तु को हाथ न लगाने की सीख दी। उन्होंने यह भी समझाया कि अपनी गलती को बिना किसी देरी के स्वीकार करना चाहिए, किसी भी जीव को बिना वजह परेशान नहीं करना चाहिए और सभी को मित्र मानकर समता भाव रखना चाहिए, क्योंकि समता ही जीवन में शांति और समाधि लाती है।
*बच्चों को अणु मुद्रा*
*देकर प्रोत्साहित किया*
इस अवसर पर स्वाध्यायी नीरज जैन ने भी बच्चों को जीवन में निरंतर संस्कारों का रोपण करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान एक गुप्त दानदाता द्वारा बालक और महिला शिविर के लिए 18,000 रुपये की राशि भेंट की गई। शिविर में प्रतिदिन प्रश्नोत्तरी का आयोजन कर बच्चों को 'अणु मुद्रा' देकर प्रोत्साहित किया गया और समापन पर उन्हें स्वल्पाहार व शीतल पेय वितरित किए गए। शिविर की सफलता के लिए पाठशाला समिति ने साध्वी धैर्य प्रभा जी, साध्वी पुण्य शीला जी और साध्वी अनुपम शीला जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की, साथ ही शिविर में भाग लेने वाले बच्चों और सहयोग करने वाले अभिभावकों का भी आभार माना गया।

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