*देवभूमि ऋषिकेश में गंगा तट पर देवी वैष्णवी के मुखारविंद से बही ज्ञान और भक्ति की अविरल धारा*
*श्रीजी पथ भक्त मंडल की अगुवाई में क्षेत्र के 61 लाभार्थियों ने लिया संतों विद्वानों का आशीर्वाद*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद। श्री जी पथ भक्त मंडल द्वारा योग नगरी ऋषिकेश में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। गंगा तट पर आयोजित इस दिव्य आयोजन में कथा प्रवक्ता देवी वैष्णवी जी भट्ट ने सात दिनों तक श्रीमद्भागवत महापुराण का रसपूर्ण वाचन करते हुए भगवान की विभिन्न लीलाओं एवं दिव्य चरित्रों का गुणगान किया।
कथा के दौरान देवी वैष्णवी जी ने बताया कि मनुष्य को भगवान के प्रत्येक स्वरूप का पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ स्मरण एवं भजन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को अपनी मृत्यु का समय ज्ञात था, किंतु आज के मनुष्य को यह नहीं पता कि जीवन का अंतिम क्षण कब आएगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को हर समय प्रभु भक्ति और ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर रहना चाहिए।
*भगवान की लीलाओं का हुआ विस्तृत वर्णन*
कथा के प्रथम दिवस श्रीमद्भागवत के महत्व और “सत्यम् धीमहि” के आधार पर प्रवचन का शुभारंभ हुआ। द्वितीय दिवस भगवान की विविध लीलाओं तथा राजा परीक्षित द्वारा शुकदेव जी से भागवत श्रवण के प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया गया। कथा में बताया गया कि भगवान ने विभिन्न अवतार धारण कर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के साथ-साथ अपने भक्तों का उद्धार भी किया।
कथावाचन के दौरान देवी वैष्णवी जी ने यह संदेश भी दिया कि जिसने प्रभु को जिस भाव से भजा, भगवान ने उसे उसी प्रकार फल प्रदान किया। निर्मल भाव से की गई भक्ति शुभ फल देती है, जबकि द्वेष भाव से की गई आराधना भी उसी अनुरूप परिणाम देती है।
प्रह्लाद, ध्रुव सहित अनेक भक्त चरित्रों का वर्णन करते हुए भगवान के नृसिंह अवतार, मत्स्य अवतार तथा अन्य दिव्य अवतारों की कथाएं सुनाई गईं। साथ ही भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से भाई-भाई के प्रेम और आदर्श संबंधों का महत्व बताया गया।
*कृष्ण जन्म और बाल लीलाओं ने भक्तों को किया भाव-विभोर*
देवी वैष्णवी जी द्वारा कथा के विशेष प्रसंगों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, गोकुल की बाल लीलाओं, माता यशोदा के वात्सल्य प्रेम तथा गोपियों की निष्काम भक्ति का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया गया। भगवान की माखन चोरी, पूतना वध, कालिय नाग दमन, गोवर्धन पूजा एवं गोवर्धन धारण की लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
सुदामा चरित्र और द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अपने मित्र सुदामा पर की गई कृपा का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। प्रतिदिन कथा के साथ आरती, भजन, कीर्तन एवं नृत्य के माध्यम से भक्तों ने आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।
*61 श्रद्धालुओं ने किया कथा श्रवण*
पेटलावद क्षेत्र से 61 श्रद्धालुओं का समूह गंगा तट ऋषिकेश पहुंचा, जहां सभी ने श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य अधिकमास के पावन अवसर पर गंगा तट पर ज्ञान और भक्ति की गंगा प्रवाहित कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद प्रदान करना था।
*प्रतिदिन हुए विविध धार्मिक अनुष्ठान*
कथा के साथ-साथ प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक गतिविधियों का आयोजन भी किया गया। प्रथम दिवस गंगा तट से भव्य कलश यात्रा एवं भागवत पोथी यात्रा निकाली गई। द्वितीय दिवस मां गंगा की सामूहिक पूजा-अर्चना हुई। तृतीय दिवस अधिकमास के अवसर पर काशी पात्र में सामूहिक मालपुआ दान कराया गया। चतुर्थ दिवस गंगा घाट पर पितृ तर्पण किया गया।
पंचम दिवस श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से गौ पूजन कर गौमाता को हरा चारा अर्पित किया। षष्ठम दिवस गोवर्धन पूजन एवं रुद्राक्ष वृक्ष की परिक्रमा की गई। सप्तम एवं अंतिम दिवस श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध के यज्ञ के साथ साधु-संतों एवं ब्राह्मणों को भोजन कराया गया, जिसका लाभ सभी श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया।
*संतों और विद्वानों ने दिए प्रेरक संदेश*
कथा के दौरान अनेक संत-महात्मा एवं विद्वान भी उपस्थित हुए। भागवत कथा वाचक राघव शास्त्रीने अपने मधुर भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्हें आचार्य पं. श्रीहरि जी शुक्ला द्वारा लिखित *केशवामृत कथा* भेंट की गई।
डॉ. मीनाक्षी कोठारी ने भगवान की प्राप्ति के छह सूत्रों पर प्रकाश डाला। वहीं अन्य संतों ने पर्यावरण संरक्षण, सेवा भाव और योग के महत्व पर अपने विचार व्यक्त कर उपस्थित श्रद्धालुओं को सद्प्रेरणा प्रदान की।
*व्यवस्थाओं में रहा सभी का सहयोग*
आयोजन की व्यवस्थाओं का संचालन पं. अरविंद गोपाल भट्ट, पं. सौरभ जी, मूलपाठ पर विराजित जयकृष्ण कोठारी एवं सुभाष जी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर निलेश भट्ट, निलेश पुरोहित, संजय पुरोहित, ओमप्रकाश भट्ट, प्रकाश कौशिक, देवेंद्र आचार्य, हरेंद्र उपाध्याय, शांतिलाल पाटीदार, कोमल सिंह सोलंकी, बलवीर सिंह डामर, रमेश मेड़ा, शैतानमल पंवार, शंकरलाल सोनी, कमलेश ओझा, गौरव दवे, हेमांगराज भट्ट, हेमेंद्र द्विवेदी, संजय सोनी, राघवेंद्र चतुर्वेदी, अनमोल चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन वीरेंद्र भट्ट ने किया।

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