*थांदला में आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश, श्रद्धालुओं ने किया भावपूर्ण स्वागत*
*अंतर्मना अहिंसा संस्कार पदयात्रा के संदेश के साथ नगर में हुआ प्रवेश, प्रत्येक माह एक उपवास का लिया जा रहा संकल्प*
मनोज उपाध्याय,,
थांदला. दिगंबर जैन संत परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागर जी महाराज साहब का सोमवार प्रातः 7:30 बजे थांदला नगर में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। उनके आगमन पर सकल जैन समाज द्वारा बैंड-बाजों, धार्मिक जयघोषों और श्रद्धा के साथ स्वागत किया गया। नगर के प्रवेश स्थल से प्रारंभ हुई भव्य अगवानी यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
आचार्य श्री का मंगल प्रवेश नगर के प्रमुख मार्गों जवाहर मार्ग, आजाद चौक सहित विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए दिगंबर जैन मंदिर पहुंचा। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया तथा दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष बाला कोठारी सहित समाज के वरिष्ठजन, महिला मंडल, युवा वर्ग और बड़ी संख्या में धर्मावलंबी उपस्थित रहे।
आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागर जी महाराज वर्तमान में “अंतर्मना अहिंसा संस्कार पदयात्रा” के माध्यम से देशभर में आध्यात्मिक एवं नैतिक जागरण का संदेश दे रहे हैं। इस पदयात्रा का उद्देश्य समाज में अहिंसा, संयम, सदाचार, संस्कार और आत्मचिंतन की भावना को मजबूत करना है। यात्रा के दौरान आचार्य श्री लोगों को नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, जल बचाने, जीवदया और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा दे रहे हैं।
विशेष रूप से आचार्य श्री ने इस पदयात्रा के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक माह कम से कम एक उपवास करने का लक्ष्य अपनाने का संदेश दिया है। उनका मानना है कि उपवास केवल धार्मिक साधना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मसंयम और स्वास्थ्य संवर्धन का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे अपने जीवन में संयम और तप को स्थान देकर आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ें।
आचार्य श्री के सान्निध्य को लेकर थांदला में विशेष उत्साह का वातावरण देखा गया। श्रद्धालुओं ने कहा कि संतों का आगमन नगर के लिए सौभाग्य का विषय होता है और उनके प्रवचन समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। दिगंबर जैन मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ प्राप्त किया और आचार्य श्री से मंगल आशीर्वाद लिया।
आचार्य श्री के आगामी प्रवचन एवं धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर समाजजनों में विशेष उत्सुकता बनी हुई है। उनके आगमन से थांदला का धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण भक्तिमय हो उठा है।

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