*आ जाओ गुरूदेव… भक्त तुम्हें पुकारे”*
*अखंड संकीर्तन से गुरूमय हुआ पेटलावद, भक्ति की स्वर लहरियों में डूबा नगर*
आज होगी पूर्णाहुति
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद कब आओगे गुरूदेव… भक्त तुम्हें पुकारते हैं” जैसे मार्मिक और भक्तिरस से ओतप्रोत भजनों की स्वर लहरियों के बीच नगर पूरी तरह गुरूमय हो उठा है। श्री सरस्वती नंदन स्वामी भजनाश्रम पर आयोजित तीन दिवसीय अखंड संकीर्तन एवं पादुका पूजन महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के चरम पर पहुंच गया है। लगातार 16वें वर्ष आयोजित हो रहे इस महोत्सव में दूर-दूर से गुरु भक्त पहुंचकर अखंड कीर्तन का आनंद ले रहे हैं।
आश्रम परिसर में “जय गुरूदेव सत्यगुरूदेव” की अखंड धुनों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया है। गुजरात से पधारी भक्त मंडलियों की डोलियां चार समूहों में विभाजित होकर निरंतर भजन-कीर्तन कर रही हैं, वहीं नगर एवं आसपास के श्रद्धालु भी तन-मन से सेवाओं में जुटे हुए हैं। महिलाओं द्वारा गरबा प्रस्तुत कर गुरु आराधना की अनूठी छटा बिखेरी जा रही है, जिससे आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो उठा है।
*गुरु चरणों में समर्पित सेवा और प्रसादी का पुण्य लाभ*
महोत्सव के दौरान प्रतिदिन महाप्रसादी का आयोजन भक्तिभाव से किया जा रहा है। दूसरे दिन महाप्रसादी का लाभ वरिष्ठ अभिभाषक विनोद पुरोहित एवं हेमेंद्र द्विवेदी परिवार द्वारा लिया गया, वहीं तीसरे दिन मुकुट चौहान एवं सुनीता अनंत पंवार परिवार ने सेवा का पुण्य अर्जित किया। प्रतिदिन सुबह 7:30 बजे लाभार्थी परिवारों द्वारा अन्नपूर्णा पूजन संपन्न कराया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त सहभागी बन रहे हैं।
*आरती, भजन और सेवा से जीवंत हुआ आश्रम*
आयोजन में प्रतिदिन सुबह 6 बजे मंगला आरती, सुबह 9 बजे श्रृंगार आरती तथा रात्रि 9 बजे संध्या आरती का दिव्य आयोजन किया जा रहा है। आरती आश्रम प्रभारी अरविंद गोपाल भट्ट द्वारा संपन्न कराई जा रही है। देर रात तक भक्तजन आश्रम में रुककर सेवा, भजन और संकीर्तन का आनंद ले रहे हैं।
*मंगलवार को होगी पूर्णाहुति, महाआरती एवं महाप्रसादी*
समिति के सदस्यों ने समस्त गुरु भक्तों एवं धर्मप्रेमी जनता से अपील की है कि मंगलवार 26 मई को प्रातः 8:30 बजे आयोजित पादुका पूजन, उसके पश्चात 11:30 बजे महाआरती एवं महाप्रसादी में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर गुरु कृपा का लाभ प्राप्त करें।
**भक्ति, सेवा और समर्पण से सजा यह आयोजन पेटलावद में आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम बन गया है।**

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