प्रकांड विद्वानों ने देकर शुभ मुहूर्त किया असमंजस को दूर 02 मार्च को होलिका दहन ओर 03 मार्च को रहेगी धुलेंडी*

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प्रकांड विद्वानों ने देकर शुभ मुहूर्त किया असमंजस को दूर 02 मार्च को होलिका दहन ओर 03 मार्च को रहेगी धुलेंडी*

 *प्रकांड विद्वानों ने देकर   शुभ मुहूर्त किया असमंजस को दूर  02 मार्च को होलिका दहन ओर 03 मार्च को रहेगी धुलेंडी*

*एक दीन एक साथ मिलकर बरसाए प्रेम के रंग ,खेले जमकर होली*आप सभी को हेप्पी होली*

*नगर में 26 से ज्यादा स्थानों पर   होलिका दहन, नव शिशुओं को देकर तपन ओर फेरे  ढूंढ परम्परा का भी होगा आयोजन*

(मनोज पुरोहित/पीयूष पटवा)

पेटलावद।  प्रेम,उत्साह और रंगों का त्योहार होली ,जो की फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला भारत का सबसे पुरातन त्योहार है ,प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी नगरवासी इस त्यौहार को मनाने के लिये उत्सुक है, अंचल की परम्परानुसार फाग उत्सव, भगोरिया पर्व की शुरुआत गत सप्ताह से शुरू हो चुकी है , व्ही नगर में लगभग 24 से 26 स्थानों पर  होलिका दहन किया जाएगा जिसकी तेयारी भी चल रही है।


*शुभ मुहूर्त में होगा होलिका दहन*

*नगर के  सुप्रसिद्ध  ज्योतिरविंद  डॉ  श्री के के श्रीवास्तव के अनुसार*



*2 मार्च होलिका दहन 3 मार्च को होली रंगोत्सव*

इस वर्ष होली की पूर्णिमा पर विशेष स्थिति बन रही है। 

हमेशा की तरह पूर्णिमा के पूर्वार्द्ध में भद्रा रहेगी जबकि पूर्णिमा के उत्तरार्द्ध में चन्द्र ग्रहण के कारण वेध‌ रहेगा।

पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 5 बज कर 56 मिनट से आरंभ होकर 3 मार्च को शाम 5 बज कर 8 मिनट तक रहेगी।

*इस तरह पूर्णिमा तिथि प्रदोषकाल एवं रात्रि में केवल 2 मार्च को ही रहेगी।*

भद्रा 2 मार्च सोमवार शाम 5 बज कर 56 मिनट से 3 मार्च को प्रातः पूर्व 5 बज कर 29 तक रहेगी।

इस स्थिति में शास्त्रानुसार पूर्णिमा की रात्रि में भद्रा  होने पर भी प्रदोषकाल में ही  होलिका पूजन करना चाहिए। 

होलिका दहन भी शास्त्रानुसार प्रदोषकाल में किया जा सकता है।

इसके अलावा 3 मार्च को प्रातः 5 बज कर 30 मिनट पर भद्रा के बाद  6 बज कर 30 मिनट तक भी सूर्योदय एवं ग्रहण का वेध लगने से पूर्व होलिका दहन किया जा सकता है।

3 मार्च को रात्रि में पूर्णिमा तिथि नहीं होने से इस दिन शास्त्रानुसार होलिका पूजन और होलिका दहन नहीं किया जा सकता है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार होलिकादहन केवल और केवल पूर्णिमा तिथि में  रात्रि में ही होता है।

*चूँकि प्रदोषकाल में एवं रात्रि में पूर्णिमा तिथि केवल 2 मार्च सोमवार को ही रहेगी।* 

अतः  सोमवार को ही रात्रि में होलिकादहन शास्त्रसम्मत है।

भद्रा, सदैव पूर्णिमा के पूर्वार्ध में रहती है एवं भद्रा में होलिकादहन का सामान्यतः निषेध है। 

भद्रा 2 मार्च सोमवार को 5 बजकर 56 मिनिट से रात्रि में प्रातः पूर्व 5 बजकर 29 मिनिट तक रहेगी । 

इस स्थिति में यदि पूरे प्रदोषकाल में भद्रा हो और रात्रि में भी भद्रा हो तो भद्रामुख के समय का त्याग कर प्रदोषकाल में ही भद्रा होने पर भी होलिका पूजन और होलिका दहन किया जाना चाहिए।

अतः 

होलिका पूजन एवं दहन 

1. दिनांक 2 मार्च सोमवार को प्रदोष काल में 5:56 से 7:10 तक।

अथवा उपर्युक्त प्रदोषकाल में होलिका पूजन और 

2. दिनांक 2/3 मार्च को रात्रि में प्रातः पूर्व 5:29 से 6:30 तक सूर्योदय पूर्व होलिका दहन श्रेष्ठ है।

रंगोत्सव धुलेंडी 3 मार्च मंगलवार को ही रहेगा। ग्रहण के वेध काल में रंगोत्सव सम्बन्धित कोई निषेध नहीं है।

*होलिका दहन व धूलंडी(धूलीवंदन)निर्णय*

*नगर के जानेमाने कर्मकांडी ओर भगवताचार्य पण्डित श्री पंकज नन्दनजी दवे के अनुसार*


होलिका पूजन =फाल्गुन सुदी चौदस,दि.2/मार्च/2026(नोट:इस दिन शाम को सूर्यास्त से पूर्व पूर्णिमा लग जाएगी ) अतः पूर्णिमा की रात्रि में व प्रदोष काल में ही होलिका पूजन व दहन शास्र सम्मत हैं ।होलिका पूजन व दहन शाम 6.28 से रात्रि 8.54 तक करें ।

धूलंडी =फाल्गुन सुदी पूर्णिमा दि.3/मार्च/2026 धर्मशास्त्रानुसार होलिका दहन के अगले दिन धूलंडी खेलने का मत हैं ।

ग्रहण वेध एवं देवता स्पर्श: दि.3/मार्च/2026 की सुबह 6.32 पर ग्रहण वेध (सूतक) लगेगा, इससे पूर्व मंदिरों एवं घरों पर भगवान की मूर्ति को रंग-गुलाल लगाया जा सकता है इसके पश्चात मूर्ति स्पर्श नहीं होगा ।(आपस में होलिका उत्सव मनाने व रंग खेलने में कोई दोष नहीं हैं )

ग्रहण काल=दि.3/मार्च,

शाम 6.32 से शाम 6.46 तक  रहेगा ।

*होली पर्व निर्णय होलिका दहन व ग्रहण काल निर्णय*

*जय गोपाल वैदिक ज्योतिष एवम कर्मकांड पंडित नितेश कुमार दवे के अनुसार*


1.) होली का पूजन व दहन दिनांक 02.03.2026 सोमवार चतुर्दशी चतुर्दशी शुभ समय संध्या काल 6:36 मिनट के बाद शास्त्रों के अनुसार यदि भद्रा निशिथ के बाद तक रहे तो भादरा में ही प्रदोष काल में भद्र का मुख छोड़ कर होली का दहन करना चाहिए इस वर्ष प्रदोष में भद्र का मुख नहीं रहेगा अतः प्रदोष वेला में ही होली दहन करना शास्त्रोक्त है।

होली का पूजन:- दिनांक 02.03.2026 शाम 3:39 से 6:34 तक होली का पूजन करें

2.) चंद्र ग्रहण :- फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार दिनांक 03.03.2026 को धुलेटी के दिन रहेगा।

ग्रहण स्पर्श :- दिन के 3:20 मिनट

ग्रहण प्रारंभ दिन के 4:35 से

ग्रहण मध्य शाम 5:04 मिनट

ग्रहण समाप्त - शाम 6:47 मिनट (कूल 3 घंटा 27 मिनट का रहेगा)

*नव शिशुओं को तपन कर ढूंढ का आयोजन*

धार्मिक मान्यताओं और परम्परा अनुसार होलिका दहन के समय नव जन्मे शिशुओं को होलि का तपन देने का रिवाज है अर्थात जिन बालक बालिकाओं का जन्म इस वर्ष होली के पूर्व हुआ है  उन सभी को होलिका दहन के समय फेरे देकर   पूजन किया जाता ,गीत संगीत, आनन्द ओर सहभोज के आयोजन के साथ खुशियां मनाई जाती है  जिसे बोलचाल की भाषा मे ढूंढ़ कहा जाता है। नगर में सिर्वी समाज मे उक्त आयोजनों को बड़े ही पारम्परिक अंदाज में मनाया जाता है ।

 



 

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