*20 वर्षों से सेवा दे रहे गो-सेवकों का फूटा दर्द, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद । मध्यप्रदेश गो-सेवक-मैत्री संघ झाबुआ के तत्वावधान में अपनी लंबित मांगों को लेकर गो-सेवकों ने हुंकार भरी है। जिलाध्यक्ष मांगीलाल निनामा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन पशु चिकित्सालय में डॉ. सुरेंद्रसिंह खराड़ी को सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने पिछले दो दशकों से हो रही अनदेखी पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
*वर्षों की सेवा, पर हाथ खाली**
ज्ञापन में प्रमुखता से बताया गया कि मध्यप्रदेश में गो-सेवक और गो-मैत्री कार्यकर्ता पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से पशुपालन एवं डेयरी विभाग की योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बना रहे हैं। कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण, प्राथमिक उपचार और दुग्ध समृद्धि योजना जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं में इनकी भूमिका रीढ़ की हड्डी के समान है, लेकिन इसके बावजूद शासन स्तर पर इन्हें अब तक कोई निश्चित मानदेय नहीं दिया जा रहा है।
"*5 रुपये में कैसे चलेगा घर?*"
जिला सचिव नानसिंह भूरिया ने आर्थिक तंगहाली का जिक्र करते हुए कहा कि कई योजनाओं में गो-सेवकों को मात्र 5 रुपये प्रति परिवार जैसी अत्यंत अल्प राशि दी जा रही है। उन्होंने पीड़ा जताते हुए कहा, "इतनी कम राशि में तो हमारे पेट्रोल का खर्च भी नहीं निकलता, परिवार पालना तो दूर की बात है।"
गो-सेवक संघ ने शासन के सामने अपनी तीन मुख्य मांगें रखी हैं कि गो-सेवक/गो-मैत्री को ग्राम पंचायत स्तर पर नियुक्त किया जाए। ए.आई. टेक्नीशियन और गो-मैत्री कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक मासिक मानदेय दिया जाए। वर्षों से विभाग को सेवाएं दे रहे कार्यकर्ताओं को शासकीय मान्यता और कार्य सुरक्षा प्रदान की जाए।
*आंदोलन किया जाएगा*
संघ के उपाध्यक्ष गणपतलाल मकवाना ने जोर देते हुए कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गो-सेवकों को स्पष्ट अधिकार दिए जाने चाहिए ताकि वे बेहतर ढंग से कार्य कर सकें।
गो-सेवक संघ ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में वे प्रदेश व्यापी उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

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