शरद पूर्णिमा पर हुई रास पंचाध्यायी कथा* —

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शरद पूर्णिमा पर हुई रास पंचाध्यायी कथा* —

 *शरद पूर्णिमा पर हुई रास पंचाध्यायी कथा* — 

*आत्मा और परमात्मा के मिलन की दिव्य लीला का वर्णन* 

(मनोज पुरोहित)

 *पेटलावद।* शरद पूर्णिमा की पावन रात्रि में नगर के श्री सरस्वती नंदन स्वामी भजनाश्रम पर आयोजित रास पंचाध्यायी कथा में कथा वाचिका सुश्री वैष्णवी भट्ट ने भगवान श्रीकृष्ण के महारास की अद्भुत महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “महारास कोई साधारण घटना नहीं, यह आत्मा का परमात्मा से मिलन की दिव्य लीला है।”


कथा मध्य रात्रि तक चली, जिसके पश्चात भजनों के साथ महाआरती और महाप्रसादी का लाभ भक्तों ने लिया। कथा का शुभारंभ आरती से हुआ, जिसमें अभिभाषक विनोद पुरोहित एवं उनके परिवार ने पूजा-अर्चना का लाभ लिया।

सुश्री भट्ट ने कहा कि “भागवत का प्राण रास पंचाध्यायी है और रास पंचाध्यायी का मूल गोपी गीत है। शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने असंख्य रूप धारण कर प्रत्येक गोपी के साथ रास रचाया था। यह किसी सांसारिक मिलन की नहीं, बल्कि आत्मा के परमात्मा से मिलन की लीला है। सखी भाव में ही महारास का अनुभव संभव है।”


उन्होंने आगे कहा कि “काम वासना और प्रेम में गहरा अंतर है। काम वासना मधु-मिश्रित विष है, जबकि प्रेम दिव्य सुधा है। काम का विषय तृप्ति है तो प्रेम का विषय त्याग। आज की रात्रि में चंद्रमा सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और भगवान श्रीकृष्ण रूपी अमृत मानव को प्राप्त होता है। इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का भी प्राकट्य हुआ था।”

सुश्री भट्ट ने मीरा बाई की भक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि “मीरा बाई ने भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न कर सशरीर गोलोक धाम प्राप्त किया था।”

 *गौ माता की रक्षा का आह्वान* 

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि “गौ माता, संत और ब्राह्मण का सम्मान करना प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है। हमें गौ माता की रक्षा और पंचगव्य का सेवन करना चाहिए तथा सदैव गोसेवा के लिए तत्पर रहना चाहिए।”

 *भजन और महाप्रसादी से भक्तिमय हुआ वातावरण* 

कथा के मध्य ‘‘मेरो प्यारो नंदलाल किशोरी राधे श्यामा प्यारी राधे’’ जैसे भजनों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा श्रवण के पश्चात रात्रि 12:30 बजे महाआरती का आयोजन हुआ और उपस्थित भक्तों को महाप्रसादी का वितरण किया गया।


*इनकी रही उपस्थिति*


कार्यक्रम में पं. अरविंद गोपाल भट्ट, मनोज जानी, मनोज पुरोहित, निलेश पुरोहित, धर्मेंद्र द्विवेदी, संजय पी. लोढा, निर्मल व्यास,कांतिलाल परमार, सुभाष वर्मा, गोकुल मिस्त्री, नारायण राठौड़, चंद्रभानु सोनी, कन्हैयालाल गवली, चित्रांश सोनी, हेमांगराज भट्ट, निखिल भट्ट, शैतानमल पंवार, संजय मालवी, राकेश लोहार, धर्मेंद्र द्विवेदी ,धर्मेंद्र जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 



 

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