*तमिलनाडु में विदेशी विद्यार्थीयो को शास्त्रों के अध्ययन में सहयोग कर रहे संस्क्रतविद श्री मोहन डामर*
*संस्कृत भारती का तीन दिवसीय महासम्मेलन नवंबर में*
(मनोज पुरोहित)
पेटलावद।झाबुआ जिले के प्राचीन तीर्थ शिवकुंड शबरी धाम बेकलदा से जुड़े संस्कृत प्रचारक मोहन डामर इन दिनों तमिलनाडु के कोयम्बतूर में जहां स्वयं भी श्री मद्भभगवतगीता और उपनिषदों का अध्ययन कर रहे हैं और विदेशी विद्यार्थीगण को वेदान्त हमारे शास्त्रों के अध्ययन में सहयोग कर रहे हैं । श्री डामर संस्कृत का अध्यापन , दैनिक जीवन में आवश्यक मन्त्रों का कण्डस्थीकरण और श्रीमद्भगवद्गीता का पारायण करवाते हैं।
वहां के रीति रिवाज के बारे में श्री डामर ने बताया कि दक्षिण भारत में अष्टमी को देवी पूजा के साथ पूजा स्थल पर हमारे महत्वपूर्ण पुस्तक या धार्मिक ग्रन्थ रखे जाते हैं। नवमी को कुछ नहीं पढ़ते हैं। दशहरे के दिन पूजा के बाद ये सब गुरुजी से या अपनों से बड़ों के हाथों से आशीर्वाद के साथ ग्रहण करते हैं। ये ग्रन्थ स्वामी सिद्धबोधानन्द सरस्वती जी ने मोहन डामर को भेंट किए।
*चार वर्ष में होने वाला सम्मेलन नवंबर में*
श्री डामर ने बताया कि हर चार वर्ष में होने वाले संस्कृत भारती का महासम्मेलन 7 - 8 एवं 9 नवंबर को कोयम्बतूर में प्रस्तावित है। इस महासम्मेलन में झाबुआ जिले से पांच प्रतिनिधि शामिल होंगे। भारतवर्ष के अलावा 26 से भी अधिक देशों के करीब पांच हजार प्रतिनिधि यहां पहुंचेंगे।

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