*सेठो के सेठ श्री सांवरिया सेठ के भण्डार में निकले 28 करोड़ रुपये, 143 कीग्रा चांदी 1-75 किग्रा सोना*
*राठौर समाज पेटलावद ने दीपावली पर निकाली सावरिया सेठ की नवीन प्रतिमा की शोभायात्रा*
*लक्ष्मीनारायण मंदिर पर विशेष पूजा-अर्चना और महाआरती के साथ भक्तों ने किया सांवरिया सेठ का महाभिषेक*
(मनोज पुरोहित)
*पेटलावद।* राजस्थान राज्य के चित्तोड़गढ़ जिले के गांव मंडफिया में भगवान सावलिया सेठ मंदिर का विश्व प्रसिद्ध मंदिर भक्तो कि आस्था का केंद्र है । उक्त मन्दिर का दीपावली पर भण्डार खोला गया इस बार रिकार्ड तोड पैसे निकले
19 अक्टूबर को भण्डार खोला गया है जिसमें 28 करोड रुपए निकले बताया जा रहा है कि 143 किलो चांदी निकली ओर पोने दो किलो सोना निकला
यह गणना 4 भागो में की गई।
*नगर में आई सावरिया सेठ कि पवित्र प्रतिमा*
सनातन धर्म की आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम शुक्रवार को पेटलावद नगर में देखने को मिला, जब श्री सांवरिया सेठ की पवित्र प्रतिमा की शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई। भक्ति और भाव से ओत-प्रोत यह शोभायात्रा श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव साबित हुई।
नगर के परम भक्त दीपक राठौड़, हरिओम राठौड़, हरिश राठौड़ शिवा राठौड सोहन राठौर सुरेश राठौड़ देवेंद्र राठौर राहुल राठौर संजय राठौर नरसिग और उनकी पूरी भक्त मंडली प्रतिमाह भगवान सांवरिया सेठ के दर्शन हेतु मंडफिया धाम जाती है। इस बार भक्तों की अपार भक्ति और उत्साह के चलते मंडफिया से भगवान की एक अद्भुत चित्र प्रतिमा को विधि-विधानपूर्वक पेटलावद लाया गया। नगर प्रवेश के साथ ही शोभायात्रा में जयघोषों का ऐसा वातावरण बना कि हर दिशा में “जय सांवरिया सेठ की!” की गूंज सुनाई देने लगी।
नगरवासियों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। भक्तों की श्रद्धा देखकर ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं भगवान सांवरिया सेठ नगर में पधार कर अपने भक्तों का आशीर्वाद दे रहे हों।
शोभायात्रा के पश्चात भगवान की प्रतिमा को लक्ष्मीनारायण मंदिर ले जाया गया, जहां मंदिर के पुजारी पं. कृष्णकांत शुक्ला द्वारा मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना एवं महाआरती संपन्न की गई। महाआरती के समय पूरा मंदिर परिसर “सांवरिया सेठ की जय” के जयकारों से गूंज उठा। भक्ति बाबूलाल हीरा जी राठौड़ द्वारा नोटों की माला लक्ष्मी नारायण भगवान को भेंट की गई
*सांवरिया सेठ की महिमा*
श्रद्धा का साक्षात स्वरूप
भगवान सांवरिया सेठ, जिन्हें श्रीकृष्ण का रूप भी कहा जाता है, अपने भक्तों के दुख हरने वाले, सौभाग्य और समृद्धि के दाता माने जाते हैं। कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से सांवरिया सेठ की शरण में आता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
भक्त अपना कोई भी नया कार्य प्रारंभ करने से पहले सांवरिया सेठ की आराधना कर उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। व्यापारी, विद्यार्थी, गृहस्थ – सभी अपने जीवन में सफलता और शांति के लिए सांवरिया सेठ का स्मरण करते हैं।
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ ज़िले के मंडफिया धाम में स्थित श्री सांवरिया सेठ का मंदिर आज देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है। कहा जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की झोली कभी खाली नहीं लौटती।
*भक्ति में लीन नगर, भाव-विभोर श्रद्धालु*
शोभायात्रा के दौरान हर गली, हर चौक भक्ति रंग में रंगा नजर आया। महिलाएं थालियों में आरती लेकर खड़ी थीं, बच्चे फूल बरसा रहे थे, और युवाओं की टोली “सांवरिया सेठ के जयकारे” लगाती चल रही थी।
भक्तों की भक्ति देखकर ऐसा लगा मानो पेटलावद में “नंदलाल” स्वयं विराजमान हों।
कार्यक्रम के अंत में सभी भक्तों ने महाप्रसादी का लाभ लिया और अपने जीवन में शांति, समृद्धि एवं सद्भाव की कामना की।
भक्त दीपक राठौड़ ने कहा की हमारे लिए सांवरिया सेठ केवल भगवान नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। उनके भरोसे ही हर कार्य सफल होता है।”
भक्त हरीश राठौड़ ने कहा की सांवरिया सेठ की कृपा से पेटलावद नगर इन दिनों भक्ति और धर्ममय वातावरण से आलोकित है। श्रद्धालुओं का यही विश्वास है कि जब तक सांवरिया सेठ का नाम नगर में गूंजता रहेगा, तब तक यहां सुख, शांति और समृद्धि बनी रहेगी।

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