*भव्य कलश यात्रा के साथ बरवेट में श्रीमद्भभागवत कथा का हुआ भव्य शुभारंभ*

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*भव्य कलश यात्रा के साथ बरवेट में श्रीमद्भभागवत कथा का हुआ भव्य शुभारंभ*

 *भव्य कलश यात्रा के साथ बरवेट में  श्रीमद्भभागवत कथा का हुआ भव्य शुभारंभ*

(मनोज पुरोहित)

पेटलावद - भव्य एवं पारंपरिक वेश में बुधवार से नगर के पूर्व दिशा में स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर प्रांगण में श्री मद् भागवत कथा का कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। श्री कुंज आश्रम उज्जैन की साध्वी श्री सुगना बाईसा के नेतृत्व में प्राचीन शंकर मंदिर से पवित्र जलस्त्रोत से जल भरने के साथ शुरू हुई कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु शामिल रहीं। पवित्र जलस्त्रोत से कलश को भर कर लाने के बाद कथा आयोजन स्थल पर धार्मिक विधि एवं मंत्रोच्चरण के साथ स्थापित किया गया।  आरती के साथ शुरू किए गए श्रीमद् भागवत कथा का श्रद्धालुओं को सर्वप्रथम इसकी महिमा से अवगत कराया।


व्यास पीठ से कथा व्यास साध्वी श्री सुगणा बाईसा ने श्रीमद्भागवत का अर्थ बताते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण (विष्णु) से संबंधित पावन कथा, जो ज्ञान, भक्ति और वैराग्य प्रदान करती है। यह केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भक्ति का अमृत है, जिसे सुनकर मन शुद्ध होता है, अहंकार नष्ट होता है और ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत होता है। 'भागवत' शब्द भक्ति (भ), ज्ञान (ग), वैराग्य (व) और तत्व/त्याग (त) का संगम है।


उन्होंने बताया कि विश्व में सभी कथाओं में ये श्रेष्ठ मानी गई है। जिस स्थान पर इस कथा का आयोजन होता है, वो तीर्थ स्थल कहलाता है। इसका सुनने एवं आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियां को ही मिलता है। ऐसे में अगर कोई दूसरा अन्य भी इसे गलती से भी श्रवण कर लेता है, तो भी वो कई पापों से मुक्ति पा लेता है। इसलिए सात दिन तक चलने वाली इस पवित्र कथा को श्रवण करके अपने जीवन को सुधारने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। अगर कोई सात तक किसी व्यवस्तता के कारण नहीं सुन सकता है, तो वह दो तीन या चार दिन ही इसे सुनने के लिए अपना समय अवश्य निकालें। तब भी वो इसका फल प्राप्त करता है, क्योंकि ये कथा भगवान श्री कृष्ण के मुख की वाणी है, जिसमें उनके अवतार से लेकर कंस वध का प्रसंग का उल्लेख होने के साथ साथ इसकी व्यक्ति के जीवन में महत्ता के बारे में भी बताया गया है। इसके सुनने के प्रभाव से मनुष्य बुराई त्याग कर धर्म के रास्ते पर चलने के साथ साथ मोक्ष को प्राप्त करता है। शास्त्री ने बताया कि इस कथा को सबसे पहले अभिमन्यु के बेटे राजा परीक्षित ने सुना था, जिसके प्रभाव से उसके अंदर तक्षक नामक नाग के काटने से होने वाली मृत्य़ु का भय दूर हुआ और उसने मोक्ष को प्राप्त किया था। आज की आरती और प्रश्न का लाभ निलेश पटेल परिवार ने लिया।

 



 

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