भरोसो दृढ़ इन चरणन केरो,,,आचार्य जैमिन जी
जगन्नाथ पूरी शिव कथा में उमड़े श्रद्धालु
जगन्नाथ पूरी,,,
भगवान पर भरोसा कर कर भक्ति करें निस्वार्थ भक्ति करें कभी भी स्वार्थ रखकर भक्ति न करें क्योंकि हरि पर विश्वास रखेंगे तो ही सार्थक होगी जहां विश्वास होता है वही हरि का वास होता है तो वक्तव्य उड़ीसा में चल रही जगन्नाथ पुरी हरिहर सेवा संस्थान दाहोद द्वारा शिव कथा का आयोजन किया गया इस कथा में गुजरात मध्य प्रदेश एवं उड़ीसा के कई भक्त शामिल हुवे , कथा के दौरान 12 ज्योतिर्लिंग कथा की उत्पत्ति कैसे किस प्रकार से 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन किया गया साथी निलंजन पर्वत के बारे में विस्तार से बताया भीलवाड़ा भगवान के दर्शन किस प्रकार से होते हैं चारों धाम में एक धाम जो उड़िसा के पूरी में जगन्नाथ भगवान मंदिर है यहां जीवन में एक बार अवश्य यात्रा करें साथ ही भगवान जगन्नाथ के बारे में विस्तार से बताया साथ ही ध्वजा , चक्र,रसोई के बारे में बताया,
,,,,शिव भक्ति ही सर्वोपरि है ,,,,,
शिव कथा के दौरान शिव का मूल रूप पंचानंद है शिव के उतर मुख से अकार,पश्चिम से उकार,दक्षिण मुख से मकार इन तीनों दिशा को मिलाकर ओम बनता पूर्व मुख से नाद स्वर मध्य मुख से उत्पन्न हुवे पांचों से पंचाक्षर मंत्र की उत्पति हुई जिनके गले में रुद्राक्ष की माला, सिर पर त्रिकुंड धारण करते है वह शिव समान हे शिव मानस की पूजा का महत्व भाव भक्ति से शिव की मानसिक पूजन कई प्रकार के कष्ट दूर होते है
,,,विश्वास के बिना भक्ति अधूरी,,,,
ईश्वर पर भरोसा करेंगे तो भी बेड़ा पार लगेगा भरोसे के बिना भक्ति अधूरी है ईश्वर को ढूंढने की जरूरत नहीं वह उसके समय पर खुद मिल जाते हैं प्रभु का स्मरण करना ही मातृ भक्त है हरी और हर की पूजा करने से ही हरी और हर मिल जाते हैं जहां विश्वास नहीं होता वहां पर हरि नहीं मिलते भरोसे पर पूरी दुनिया कायम कलयुग में नाम स्मरण करने से एवं शिव भक्ति करने से जीवन धन्य होता हे
,,,,जगन्नाथ भगवान ,,,,,
दारू (लकड़ी) से बने भगवान कृष्ण,सुभद्रा,बलराम का निर्माण किया गया वर्ष में एक बार रथ यात्रा निकलती है उस दौरान भगवान का जलाभिषेक पूजन अनुष्ठान किया जाता तब भगवान को बुखार आ जाता है मासी के घर आराम करने जाते दस दिन बाद रथ यात्रा आरंभ होती हैं विशेष लकड़ी से रथों का निर्माण किया जाता उर पर भगवान सवार कोकर पुनः मंदिर पर आते हैं

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