जुबिली वर्ष 2025 “आशा के तीर्थयात्री,
क्रिसमस का भव्य, भक्तिपूर्ण एवं सांस्कृतिक आयोजन
झाबुआ,,,जुबिली वर्ष 2025 “आशा के तीर्थयात्री” के अंतर्गत धर्मप्रांत झाबुआ की विभिन्न पल्लियों में क्रिसमस का भव्य, भक्तिपूर्ण एवं सांस्कृतिक आयोजन
कैथोलिक कलीसिया द्वारा मनाए जा रहे जुबिली वर्ष 2025 – “आशा के तीर्थयात्री” के पावन अवसर पर कैथोलिक धर्मप्रांत, झाबुआ की विभिन्न पल्लियों में प्रभु येसु मसीह का जन्मोत्सव (क्रिसमस) अत्यंत श्रद्धा, हर्षोल्लास और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। सम्पूर्ण धर्मप्रांत प्रार्थना, गीत, आनंद और भाईचारे के वातावरण से सराबोर रहा।
कैरोल गीतों से आरंभ हुआ उत्सव
सभी पल्लियों में क्रिसमस का उत्सव कैरोल गीतों के साथ आरंभ हुआ। बच्चों, युवाओं एवं गायक दलों द्वारा गाए गए मधुर कैरोल गीतों ने प्रभु येसु के जन्म की शुभ-सूचना को हृदयस्पर्शी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके पश्चात गोशाला (चरनी/क्रिब) की आशीष किया गया, जो प्रभु के सादे, विनम्र और प्रेमपूर्ण जन्म की स्मृति को जीवंत करता है।
इसके उपरांत सभी पल्लियों में श्रद्धा और भक्ति के साथ पवित्र यूखरिस्तीय समारोह सम्पन्न हुआ।
क्रिसमस की रात्रि को थांदला पल्ली में धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष महामहिम बिशप पीटर खराड़ी ने पवित्र मिस्सा अर्पित की।
रतलाम पल्ली में झाबुआ डायोसिस के विकार जनरल द्वारा क्रिसमस का पवित्र मिस्सा सम्पन्न किया गया।
बड़ी धामनी पल्ली में झाबुआ डायोसिस के सचिव द्वारा पवित्र यूखरिस्तीय समारोह संपन्न कराया गया।
इसी क्रम में मेघनगर पल्ली में भी क्रिसमस का उत्सव अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया, जहाँ मुख्य अनुष्ठाता फा. संजय कुजूर, एसवीडी रहे। उनके प्रवचन में प्रभु येसु के जन्म द्वारा संसार को मिली आशा, प्रेम और शांति के संदेश पर विशेष बल दिया गया।
सभी पल्लियों में दिए गए प्रवचनों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि ईश्वर का मानव रूप में इस संसार में आना मानवता के लिए मुक्ति, प्रेम और आशा का महान संदेश है। जुबिली वर्ष 2025 के संदर्भ में यह संदेश और अधिक सशक्त रूप से हमें “आशा के तीर्थयात्री” बनकर अपने परिवारों, पड़ोस और समाज में प्रभु येसु के मूल्यों को जीने के लिए प्रेरित करता है।
पवित्र यूखरिस्तीय समारोह के पश्चात सभी पल्लियों में शांति का आदान-प्रदान किया गया, जहाँ विश्वासियों ने एक-दूसरे को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। इसके बाद नृत्य, गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभु येसु के जन्म का आनंद साझा किया गया। बच्चों, युवाओं और परिवारों की सक्रिय सहभागिता ने उत्सव को और अधिक जीवंत एवं स्मरणीय बना दिया।
सेवा और एकजुटता की भावना
क्रिसमस के इस पावन अवसर पर विशेष रूप से गरीबों, वंचितों और कम सुविधाओं में जीवन यापन करने वाले भाइयों-बहनों के लिए प्रार्थनाएँ की गईं। सेवा, सहयोग और साझा किए गए उपहारों के माध्यम से उनके साथ क्रिसमस की खुशियाँ बाँटी गईं। जुबिली वर्ष के संदर्भ में सभी को प्रेम, शांति, सेवा और भाईचारे के मार्ग पर आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।
कैथोलिक धर्मप्रांत, झाबुआ की ओर से समस्त विश्वासियों एवं समाज के सभी वर्गों को क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं तथा यह प्रार्थना की गई कि बालक येसु मसीह सभी के जीवन में—विशेषकर जरूरतमंदों और वंचितों के लिए—आशा, शांति, आनंद और प्रेम का प्रकाश फैलाएँ।

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