,,,,,, जनसंपर्क विभाग की जर्जर हालत ,,
,,,,,,,,,छत से टपकता पानी,
,,,,पत्रकारों के बैठने की व्यवस्था तक नहीं,,
मनोज उपाध्याय,राजेश डामर,,
झाबुआ,, जिले में शासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का जिम्मा संभालने वाला जनसंपर्क विभाग खुद बदहाल हालात से जूझ रहा है। यहां छत से पानी टपक रहा है, टेबल-कुर्सियां खिसकाकर अधिकारी और कर्मचारी किसी तरह काम कर रहे हैं। वहीं पत्रकारों के बैठने की भी कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
,,,नहीं है बैठने की सुविधा,,
मंगलवार शाम को जब कई पत्रकार शासकीय खबरों के लिए विभाग पहुंचे, तो छत से टपकते पानी के कारण अंदर बैठना तक मुश्किल हो गया। जनसंपर्क अधिकारी खुद पानी की बूंदों से बचते हुए अपनी टेबल हटाकर काम कर रही थीं।
,,,जिले के पत्रकारों के लिए केंद्र,,,
जनसंपर्क विभाग जिले के सभी मीडिया प्रतिनिधियों के संपर्क का प्रमुख केंद्र है, लेकिन उसकी स्थिति देखकर लगता है कि जो विभाग शासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का माध्यम है, वही खुद मरम्मत और ध्यान का मोहताज है।
,,,,,दुर्गन्ध से परेशान,,,
इस विभाग के ठीक बगल में बने जनरल टॉयलेट से उठती दुर्गंध ने भी हालात और बिगाड़ रखे हैं। सफाई न होने के कारण बदबू इतनी तीव्र होती है कि विभाग में कुछ मिनट भी रुकना मुश्किल हो जाता है।
पत्रकारों और अधिकारियों दोनों के लिए यह माहौल असहज है। सवाल यह उठता है कि जहां से ‘संचार’ और ‘समन्वय’ की शुरुआत होती है, वहां मूलभूत सुविधाओं का ही अभाव क्यों है?
शासन-प्रशासन से अपेक्षा है कि जल्द से जल्द जनसंपर्क विभाग की स्थिति सुधारी जाए, ताकि मीडिया और विभाग दोनों ही अपने दायित्वों का निर्वहन सुचारू रूप से कर सकेंगा,,,,,,?
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