_*बिजली कम्पनी झाबुआ सर्किल में 770 एवं आगरमालवा में 550 आउटसोर्स कर्मियों को दो करोड़ बीस लाख रु. एरियर नहीं देने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करें : भार्गव*_
(मनोज पुरोहित )
*पेटलावद।* पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के उज्जैेन रीजन के अन्तर्गत झाबुआ सर्किल व उसके अधीन झाबुआ, अलीराजपुर में कार्यरत करीब 770 एवं आगर मालवा सर्किल अंतर्गत सुसनेर व आगर में कार्यरत 550 बिजली आउटसोर्स ठेका कर्मियों को न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण पश्चात बड़े हुए न्यूनतम वेतन की करीब दो करोड़ बीस लाख रुपए की बकाया राशि हाइकोर्ट बेंच इंदौर के आदेश एवं श्रम आयुक्त इंदौर के निर्देश के बाद पांच माह बीतने पर भी नहीं मिली है
इस बात से आक्रोशित बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव एवं महामंत्री दिनेश सिसोदिया ने एम.डी. इन्दौर, चीफ इंजीनियर उज्जैन, कलेक्टर एवं सहायक श्रम आयुक्त झाबुआ एवं आगर मालवा को पत्र लिखकर ग्यारह माह की एरियर राशि बोनस अंतर राशि सहित नहीं देने वाले मानवबल ठेकेदार ब्रॉडकास्टर कम्पनी नोएडा एवं मे. टीडीएस मैनेजमेंट कंसलटेंट प्रा.लि. मोहाली दोनों ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर उस पर पेनाल्टी लगाने की मांग की है। झाबुआ एवं आगर मालवा दोनों ही सर्किल में ब्रॉडकास्टल कम्पेनी नोएडा का ठेका अप्रैल-2024 से सितम्बनर-2024 तक रहा। इसके बाद ब्रॉडकास्टउ कम्पेनी नोएडा का ठेका समाप्त होने पर मे. टीडीएस मैनेजमेंट कंसलटेंट प्रा.लि. मोहाली का ठेका अक्टूबर -2024 से फरवरी-2025 तक रहा, जो अभी भी जारी है। इन दोनों ही ठेकेदारों ने 11 माह के बढ़े हुए वेतन की एरियर राशि अब तक प्रदान नहीं की है
पेटलावद क्षेत्र के कर्मचारी जिलाध्यक्ष गणेश पाटीदार, सोनू नलवाया, वासुदेव परमार, सुरेश चावड़ा आदि कर्मचारियों ने संघठन का साथ देते हुए एरियल की मांग की है।
श्री भार्गव ने जारी पत्र में कहा है कि इस मामले में बिजली कंपनी के इंजीनियर अपने चहेते ठेकेदारों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई कर पेनाल्टी नहीं लगा रहे हैं और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट नहीं कर केवल खानापूर्ति वाले पत्र लिख कर अपने हाथ बचा रहे हैं, जबकि ठेकेदार बजट नहीं होने का बहाना पांच माह से बना रहा है। यदि ठेकेदार के पास एडवांस में न्यूनतम वेतन व इस रिवाइज हुए मिनिमम वेजेस एरियर देने की धनराशि नहीं थी तो उसने टेंडर की शर्तों को स्वीकार कर यह मानव बल ठेका हाँसिल ही क्यों किया? पर यदि यह ठेका लिया है तो ठेका टेंडर की लिखित शर्तों का पालन कर ठेकेदारों को पहले एडवांस में अपनी ओर से बकाया एरियर राशि आउटसोर्स कर्मियों को एकमुश्त भुगतान करना चाहिए, फिर इसका क्लेम कर बिल व दस्तावेज देकर बिजली कंपनी से यह राशि प्राप्त करनी थी। चूँकि इस प्रक्रिया में एक से दो माह का समय लगता, इसलिए ठेकेदार ने अपना पैसा नहीं फँसाया। इस तरह ठेकेदार हाइकोर्ट के आदेशों की अवमानना व श्रम आयुक्त के निर्देशों की अवहेलना कर ठेका टेंडर शर्तों का सरासर उल्लंघन कर रहे हैं पर दोषी ठेकेदार के खिलाफ बिजली अधिकारी पेनाल्टी नहीं लगा कर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने से कतरा रहे हैं।
*यह दोहरा रवैया क्यों?*
दो साल पहले हुए बिजली आउटसोर्स आंदोलन में झाबुआ व आगर मालवा सहित सभी जिलों में हड़ताल पर गए बिजली आउटसोर्स कर्मियों को एक पल में बिजली अधिकारियों ने ब्लैकलिस्ट कर नौकरी से बाहर कर दिया था। इससे पता चलता है कि बिजली अधिकारियों का ठेकेदारों के प्रति कितना झुकाव व सहानुभूति है।
श्री भार्गव का कहना है कि प्रिंसिपल नियोक्ता बिजली कंपनी है, यदि ठेकेदार बकाया एरियर की सम्पूर्ण बोनस अंतर राशि सहित भुगतान नहीं करता है तो बिजली कंपनी को स्वयं अपनी ओर से इस एरियर राशि का भुगतान करना चाहिए। पर ना तो बिजली कंपनी खुद भुगतान कर रही है, और ना ही ठेकेदार को एरियर भुगतान हेतु विवश कर रही है।
*किसको कितना मिलना है एरियर्स ?*
प्रत्येक बिजली आउटसोर्स श्रमिक को ग्यारह माह की अवधि का बोनस अंतर सहित कुल एरियर अकुशल श्रमिक को 17085, अर्द्धकुशल को 18546, कुशल को 22174 एवं उच्च कुशल को 26116 रु. भुगतान किया जाना है, जो नहीं दिया जा रहा है। यह हाइकोर्ट के आदेशों व श्रम आयुक्त के निर्देशों की अवहेलना है, यह ठेका अनुबंध की शर्तों व बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है एवं मानव अधिकारों का स्पष्टत: हनन है।

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