शिवराजसिंह जी के शासन में उच्च शिक्षामंत्री रह चुके मोहनजी यादव को भी नगर के एक कार्यक्रम में नामकरण के लिये नगरवासियों ने ज्ञापन दिया था शायद उन्हें स्मरण तो होगा ही....
संत,महात्मा,स्वतंत्रता सेनानी की नगरी छोटी काशी की उपेक्षा...
बेनाम के शासकीय महाविद्यालय में आज मुख्यमंत्री का कार्यक्रम
महाविद्यालय का नामकरण क्यों नहीं?
पिछले 20 वर्षो से उठ रही मांग को मध्यप्रदेश शासन आज तक पूरी नहीं कर पाई
मनोज उपाध्याय,
नगर के बेनामी शासकीय महाविद्यालय में प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन यादव जी आज प्रदेश स्तरीय स्व सहायता समूह का 300 करोड़ का ऋण वितरण एवं 283.81करोड़ के विकास कार्य का भूमिपूजन एवं लोकार्पण व प्राकृतिक खेती करने वाले धरती पुत्रों से संवाद,मेघावी यो का सम्मान कार्यक्रम में शिरकत करने उसी विद्यालय में पधार रहे है जहां पिछले 20 वर्षो से अधिक समय से यह विद्यालय अपने नाम के लिये तरस रहा है
वहीं शिवराजसिंह के शासन में उच्च शिक्षामंत्री रह चुके मोहनजी यादव को भी नगर के एक कार्यक्रम में नामकरण के लिये नगरवासियों ने ज्ञापन दिया था शायद उन्हें स्मरण तो होगा ही
अगर नहीं रहा हो तो आज तो वो प्रदेश के मालिक है क्या आज वो संज्ञान में लेंगे।
जिले के प्रमुख समाजजन, विभिन्न संगठन द्वारा नामकरण के लिये पुरजोर मांग की जा रही थी किंतु आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि , सफेद पोश नेता, यहां तक की प्रभारी मंत्री को भी अनेकों बार ज्ञापन के साथ विभिन्न संस्थाओं द्वारा नाम भेजे गये किंतु शासन ने आज तक इस महाविद्यालय को बेनाम ही बना रखा है पूर्व मुख्य मंत्री शिवराजसिंह चौहान के शासन काल में में दर्जनों बार नामकरण की पहल स्थानीय स्तर पर की गई किंतु वोट की राजनीति के चलते फाइल ही दफन कर दी गई गत वर्ष
महाविद्यालय के छात्रों द्वारा आदिवासी महान संत टंट्याजी के नाम से बोर्ड भी मेन गेट पर लगवा दिया था किंतु कुछ समय पश्चात कॉलेज प्रबन्धन ने वो बोर्ड ही निकलवा दिया आज संयोग देखिये वो ही कॉलेज का मैदान प्रभारी मंत्री,जिले की मंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधि गण, किस मुंह से महाविद्यालय के प्रवेश द्वार से प्रवेश करेंगे वहीं महाविद्यालय खुद अपने आप को असहज, बेनाम हो कर इन राजनीति के रसूख दारो से पूछने का साहस भी नहीं कर पायेगा की जन्म से ले कर आज तक मेरा नामकरण क्यों नहीं हो पाया क्या में बे नामी हु तो मेरे ही मैदान पर यह दिखावा क्यों?

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